झारखंड विधानसभा में एनआरसी – एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित

झारखंड विधानसभा में एनआरसी – एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित

नआरसी और एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने वाला झारखंड आठवाँ राज्य बन चुका है। आज बजट सत्र के आखिरी दिन इस प्रस्ताव को मंजूरी मिली। हेमंत सोरेन सरकार ने काफी पहले ही एनआरसी – एनपीआर की मुखालफत कर अपने मंसूबे स्पष्ट कर दिए थे। मुख्यमंत्री सोरेन ने इस प्रस्ताव के फैसले को राजहित में बताया और कहा कि एनीपीआर 2010 के पुराने दिशानिर्देशों के तहत किया जाना चाहिए।  

पश्चिम बंगाल, केरल, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली और बिहार भी एनआरसी व एनपीआर के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं। एक हफ्ते पहले ही तेलंगाना की केसीआर ( के. चंद्रशेखर राव) सरकार ने भी इसी प्रकार का प्रस्ताव पारित किया था और अब झारखंड भी इस फ़ेहरिस्त में शामिल हो गया है।

मरांडी ने वोट की राजनीति बताया

भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने इस प्रस्ताव को औचित्य विहिन बताया है। उन्होंने कहा कि एनपीआर 2010 और 2015 में भी हो चुका है। देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री ने जब स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को कोई दिक्कत नहीं होगी और ना ही किसी को संदिग्ध श्रेणी में रखा जाएगा लेकिन फिर भी इस प्रकार का प्रस्ताव पारित करना सोरेन सरकार की वोट की राजनीति को उजागर करता है। मरांडी ने सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या सरकार विदेशी नागरिकों की पहचान करना चाहती है ? यह उन्हें स्पष्ट करना चाहिए।

बता दे कि मोदी सरकार को एनआरसी और एनपीआर पर काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। गृह मंत्री अमित शाह और स्वयं पीएम मोदी के एनआरसी ना लागू करने के आश्वसान के बावजूद देश के अलग अलग राज्यों की सरकारे इसके विरूद्ध प्रस्ताव पारित कर रहीं है। झारखंड सरकार के फैसले को इसी क्रम में देखा जा रहा है।

Jharkhand LIVE Staff

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