कोरोना वायरस : हरे पत्तों से बना स्वदेशी मास्क

कोरोना वायरस : हरे पत्तों से बना स्वदेशी मास्क

भारत में जब भी कोई आपदा या महामारी की परिस्थिति उत्पन्न होती है तो अमूमन इससे लड़ने और बचाव के साधन सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम, शीर्ष पर मौजूद लोगों को ही उपलब्ध होते हैं।

कोरोना वायरस [COVID – 19] के बढ़ते मामले और उससे उपजे भय के माहौल ने सभी को झँकझोर दिया है। बाजारों में मास्क से लकेर हैंड सैनेटाइज़र जैसी महत्वपूर्ण चीज़ों की भारी कमी है। इन वस्तुओं के लिए लोग एमआरपी कीमत से 30 – 40 गुणा से भी ज्यादा की कीमत अदा कर रहे हैं। कालाबाजारी का आलम यह है कि एक 55 रूपए कीमत वाला हैंड सैनेटाइज़र 150 से 200 रूपए तक बिक रहा है। 10 रूपए वाला सामान्य सा मास्क 70 से लेकर 100 रूपए में बेचा जा रहा है।  

हैंड सैनेटाइज़र और मास्क की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए प्रशासन ने देश के कई हिस्सों में छापेमारी भी की है। मुंबई के पास भिवंडी और हरियाणा के फरीबाद में तो नकली हैंड सैनेटाइज़र बनाने वाली फैक्ट्रियों का भी भांडाफोड़ हुआ। लेकिन सरकार के इन तमाम प्रयासों के बावजूद लोगों को मास्क और हैंड सैनेटाइज़र की भारी किल्लीत का सामना करना पड़ रहा है।

भले ही बाजारों में मास्क और सैनेटाइज़र न मिल रहे हो और महानगरों एवं शहरों में लोग अधिक दाम चुकाकर इन्हें खरीद रहे हों। लेकिन गाँवों और दूरदराज़ के क्षेत्रों में तो इनका पूर्णतः आभाव है। इसीलिए गाँवों में लोग अलहदा तरीकों से इस महामारी से खुद की सुरक्षा कर रहे हैं।

आदिवासियों तक भले ही बड़े कंपनियों के मास्क और सैनेटाइज़र न पहुँच पाएँ हो लेकिन उन्होंने इसका बेहतरीन काठ ढूँढ निकाला है। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में आदिवासी समुदाय के लोगों ने पारंपरिक तौर तरीकों का इस्तमाल कर कोरोना वायरस से बचाव के लिए पत्ते और उसके रेशे से प्राकृतिक मास्क का इजाद किया है। भारतीय कला का इससे बेहतर और अनूठा प्रदर्शन शायद ही कहीं देखने को मिले। हाथ धोने के लिए यहाँ के ग्रामीण मिट्टी और राख के मिश्रण से बनी घोल का इस्तेमाल हैंड सैनेटाइज़र के रूप में कर रहे हैं।

ट्राइबल आर्मी नाम के ट्विटर हैंडल ने इससे जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया है। जिसके बाद कई लोगों ने इस वीडियों को रिट्वीट कर पीएम मोदी को टैग भी किया। पीएम मोदी ने आम लोगों से कोरोना से बचाव के लिए सुझावों को आमंत्रित किया था। झारखंड के गोड्डा से पूर्व सांसद फुरकान अंसारी भी आदिवासियों के इस हुनर के मुरीद हो गए। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि कोरोना से लड़ाई लड़ने में आदिवासियों का बड़ा ही नायाब तरीका है।  

Jharkhand LIVE Staff

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