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झारखंड: पुलिस अफसर ने बेटे को दिया “वीर बहादुर गांधी” का नाम

2 अक्टूबर के दिन जहाँ देश – विदेश में लोग महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रहे थे। उसी दिन झारखंड के खूंटी जिले में एसआईआरबी – 2 में पुलिस उप – अधिक्षक के पद पर तैनात किशोर कुमार रजक के घर नई किलकारियों की आवाज़ गूंजी। किशोर कुमार रजक के घर पुत्र का आगमन हुआ और उन्होंने इस नई गूंज को “वीर बहादुर गांधी” का नाम दिया।

डीएसपी किशोर रजक ने गांधी जयंती के दिन जन्मे अपने बेटे का नाम “वीर बहादुर गांधी” रखा है। वीर बिरसा मुंडा, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री को मिलाकर डीएसपी रजक ने यह नाम अपने बेटे को दिया है। झारखंड लाइव से विशेष बातचीत में डीएसपी किशोर रजक ने कहा कि “गांधी जयंती के दिन मेरे पुत्र का जन्म मेरे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। मैं गांधी को मानने वाला व्यक्ति हूँ, मैंने हमेशा उनके पदचिन्हों पर चलने का प्रयास किया है। 2 अक्टूबर के दिन ही देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती भी होती है। इसलिए मैंने अपने पुत्र के नाम में बहादुर और गांधी दोनों को जोड़ा है।”

डीएसपी किशोर कुमार रजक आगे कहते हैं कि “जिस झारखंड में मेरे बेटे ने जन्म लिया उस झारखंड की परिकल्पना भूमिपुत्र भगवान बिरसा मुंडा के बिना कर पाना नामुमकिन है, इसीलिए मैंने अपने बेटे के नाम में वीर भी शामिल किया है।”

‘शेक्सपियर’ की एक मशहूर कहावत है कि “नाम में क्या रखा है।” लेकिन इस कथन से इतर भारतीय समाज में नामों को लेकर अस्मिता और स्वाभिमान का चलन आम है जो कि किसी भी विशेष जाति, धर्म और क्षेत्र से ताल्लुकाद रख सकती है। परंतु इस बात का भी जिक्र करना जरूरी है कि डीएसपी किशोर कुमार रजक ने अपने पुत्र का नाम अस्मिता के दायरे से बाहर निकलकर देश की मूल वैचारिकी के नाम समर्पित किया है।

इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि एक तरफ जहाँ एक पुलिस अधिकारी अपने बेटे का नाम इन महान शख्सियतों के नाम पर रख इस देश की धरोहर और वैचारिकी को नई पीढ़ी को सौंप रहा है तो वहीं मानसिक रूप से दिवालिया हो चुके कुछ लोगों को गोडसे के नाम का सहारा लेना पड़ रहा है।

Jharkhand LIVE Staff

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