मध्यप्रदेश के बागी विधायक कांग्रेस में लौटेंगे ?

मध्यप्रदेश के बागी विधायक कांग्रेस में लौटेंगे ?

जाना शब्द जाना नहीं होता ‘जाना’ शब्द में लौट आने की संभावना भी उतनी ही होती है, जितना कि ना लौट आने का सताता हुआ आंतरिक भय एवं दुख। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपने जा चुके विधायकों की लौटने की आस में व्याकूलता से इंतज़ार कर रहे हैं। उन्हें अब भी विश्वास है कि बैंगलुरू के रिसॉर्ट में खूंटा गाढ़े कांग्रेसी विधायक विधानसभा की पटल पर बहुमत को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे।  हालांकि हॉटेल में कुल 22 विधायक एकत्रित हैं जिनमें से 6 विधायकों के (जो कि कमलनाथ सरकार में मंत्री भी थे) इस्तीफे स्पीकर महोदय ने मंजूर कर लिए हैं।

आज तड़के बैंगलुरू एअरपोर्ट पर दिग्विजय सिंह को नवनियुक्त कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष डीके शिवकुमार लेने पहुँचे। दिग्विजय सिंह बैंगलुरू के एक रिसॉर्ट में ठहरे पार्टी से बगावत कर चुके विधायकों से मिलने पहुँचे थे। लेकिन राज्य पुलिस की कड़ी पहरेदारी ने उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

लेकिन यक्ष प्रश्न यही बना हुआ है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद भी उनके बाकि के 16 समर्थक विधायक क्या वाकई कांग्रेस में वापसी करेंगे ? अबतक के उनके तेवरों से तो ऐसा लगता नहीं दिख रहा। इनमें से कुछ विधायकों ने वीडियो के जरिए अपना बयान जारी कर कहा कि वे बिना किसी दबाव के अपनी मर्जी से बैंगलुरू में आयें हैं और ज्योतिदारित्य सिंधिया के साथ हैं। लेकिन कांग्रेस परस्पर यह कहती आयी है कि उन विधायकों को भाजपा ने अगवा कर लिया है। इस दावे को साबित करने लिए पार्टी उनमें से कुछ विधायकों के परिजनों को मीडिया के समक्ष प्रस्तुत कर चुकी है। जिसका बाद में भाजपा ने खंडन भी किया।

राज्यपाल और स्पीकर में कौन बलवान

अब जब सिंधिया कांग्रेस छोड़ कर अपने समर्थक 22 विधायकों को भी अलग चुके हैं और भाजपा की ओर से राज्यसभा की सीट भी मिल चुकी है। तो भाजपा ने भी प्रदेश में अपनी गतिविधियाँ तेज कर दी। बाकायदा शिवराजसिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात की और विधानसभा में वर्तमान सरकार के बहुमत परीक्षण की मांग की। विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने भी बैंगलुरू में 22 विधायकों की मौजूदगी पर चिंता जाहिर की।

चिट्ठियों की अदला बदली

विपक्ष के रूख को देखते हुए सीएम कमलनाथ ने भी राज्यपाल लालजी टंडन को चिट्ठी लिख बैंगलुरू में कांग्रेस विधायकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही उन्होंने किसी भी प्रकार की खरीद फरोक्त को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने गुजारिश की। इसके जवाब में राज्यपाल टंडन ने कमलनाथ सरकार को फौरन बहुमत साबित करने हेतु चिट्ठी लिख थी। लेकिन एक दिवसीय विधानसभा की कार्यवाही में राज्यपाल के अभिवादन के बाद विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने विधानसभा 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। बता दे कि 26 मार्च को राज्यसभा की 56 सीटों पर चुनाव होने हैं।

सुप्रिम कोर्ट में पहुँचा मामला

स्पीकर के फैसले के खिलाफ भाजपा ने सुप्रिम कोर्ट का रूख कर कानूनी दाँव पैंच का आगाज कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय की दो जजों की बैंच पिछले दो दिनों से इस पर सुनवाई कर रही है और कल इसपर फैसला आने की संभावना है।   

राज्यसभा चुनाव भी एक वजह

ज्योतिदारित्य सिंधिया की कांग्रेस से नाराजगी और पाला बदलने से उपजे इस घमासान की लपटे अब गुजरात तक पहुँच चुकी है। यहाँ भी राज्यसभा की सीटों के अंक गणित को दोनों ही पार्टियाँ कांग्रेस और भाजपा अपने – अपने पक्ष में करने की जुगत में हैं। मध्यप्रदेश की 3 तो गुजरात की 4 राज्यसभा की सीटों पर चुनाव होने है।  

वैसे जिस आत्मविश्वास के साथ सूबे के मुख्यमंत्री कमलनाथ मीडिया से मुखातिब हो रहे हैं और विक्ट्री सिम्बल के साथ मुस्कराते दिख रहे हैं। उससे तो यही प्रतीत होता है कि कमलनाथ अब भी अपनी सरकार के ना गिरने को लेकर आश्वस्त हैं। भले ही ज्योतिरादित्य सिंधिया पाला बदलकर कांग्रेस को मुसीबत में डाल दिया हो, यद्यपि कमलनाथ – दिग्विजय सिंह ने हार नहीं मानी है तो इसके पीछे कोई ठोस वजहें जरूर होंगी।

Jharkhand LIVE Staff

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