राजधानी रांची में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण को लेकर झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा आयोजित राउंड टेबल मीटिंग में महिला नीति बनाने की मांग प्रमुखता से उठी।

इस बैठक में राज्य भर से विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्रामीण महिलाएं प्रतिनिधि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि सरकार महिलाओं को सिर्फ आजीविका तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे लाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

 

उन्होंने बताया कि राज्य में स्वयं सहायता समूह (SHG) से 32 लाख महिलाएं जुड़ी हैं, जो समाज और अर्थव्यवस्था को मजबूत बना रही हैं। क्रेडिट लिंकेज के जरिए महिलाएं स्वरोजगार में आगे बढ़ रही हैं और उनके उत्पाद अब बाजार में ब्रांड के रूप में पहचान बना रहे हैं।

बैठक में स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही झारखंड के लिए प्रभावशाली महिला नीति तैयार करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं में स्वाभाविक नेतृत्व क्षमता होती है, जरूरत उन्हें पहचानने और आगे बढ़ाने की है। वहीं प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. पाम राजपूत ने महिला नीति के अभाव पर चिंता जताते हुए पंचायत स्तर तक इस पर चर्चा की आवश्यकता बताई।

पद्मश्री छूटनी महतो और चामी मुर्मू ने अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं की सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान पर प्रकाश डाला।

 

इस मौके पर कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक लुईस मरांडी और श्वेता सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भी ग्रामीण महिलाओं की भूमिका को राज्य के विकास में अहम बताया।

 

कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत, उद्यमिता और सामाजिक संगठनों से जुड़ी महिलाओं ने अपने सुझाव रखे। यह बैठक राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।