झारखंड में सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री Hemant Soren अब पारंपरिक समीक्षा बैठकों पर निर्भर रहने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से योजनाओं की स्थिति पर सीधी नजर रखेंगे।
राज्य सरकार “सीएम डेटा इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म” विकसित करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे योजनाओं की प्रगति की जानकारी रियल टाइम में उपलब्ध हो सकेगी। इस पहल के तहत राज्य मुख्यालय में एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित करने की योजना है।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के निर्देश पर जॅप-आईटी ने इस परियोजना की विस्तृत रूपरेखा तैयार कर ली है। इसे “सीएम डैशबोर्ड-2” के अंतर्गत विकसित किया जा रहा है। अगले महीने Hyderabad में आयोजित होने वाले AI और आईटी निवेश कार्यक्रम में इस प्रस्ताव को विशेषज्ञों के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद इसे अंतिम रूप मिलने की संभावना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद मुख्यमंत्री को योजनाओं के साथ-साथ विभिन्न विकास सूचकांकों की भी समग्र जानकारी मिल सकेगी। इससे न केवल कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि अधिकारियों की जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। आम लोगों की शिकायतों के समाधान की स्थिति पर भी सीधे नजर रखना संभव हो जाएगा।
मुख्यमंत्री ने हाल ही में जिला और प्रखंड स्तर के कर्मचारियों के साथ सीधा संपर्क बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया है। उनका मानना है कि जमीनी स्तर से संपर्क मजबूत होने पर योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार आता है। इसी उद्देश्य से शिक्षकों, सहिया, जल सहिया और आंगनबाड़ी कर्मियों को डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इसके अलावा पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की मॉनिटरिंग को भी इस प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। 15वें वित्त आयोग और राज्य वित्त आयोग से प्राप्त राशि से गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास के काम चल रहे हैं, जिनकी प्रगति अब तकनीकी माध्यम से ट्रैक की जाएगी। भविष्य में पंचायत प्रतिनिधियों को भी टैब देने की योजना पर विचार किया जा रहा है।