Kolhan University में मंगलवार को कुलपति Prof. (Dr.) Anjila Gupta की अध्यक्षता में शैक्षणिक परिषद और अंगीभूत कॉलेजों के प्राचार्यों की अहम बैठक हुई। बैठक में झारखंड सरकार के प्रस्तावित क्लस्टर सिस्टम को लागू करने और कॉलेजों में विषयों के पुनर्गठन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान कई कॉलेजों ने कम नामांकन वाले पुराने विषयों की जगह रोजगारपरक, स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं से जुड़े नए विषय शामिल करने का प्रस्ताव रखा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने साफ किया कि स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को संरक्षण दिया जाएगा और इन्हें बंद नहीं होने दिया जाएगा।
किन कॉलेजों में क्या बदलाव प्रस्तावित?
टाटा कॉलेज, चाईबासा में मुंडारी की जगह कुरमाली विषय शामिल करने का प्रस्ताव।
महिला कॉलेज, चाईबासा में समाजशास्त्र के स्थान पर ‘हो’ भाषा शामिल करने पर सहमति।
घाटशिला कॉलेज में समाजशास्त्र की जगह मनोविज्ञान विषय शुरू करने की तैयारी।
एसबी कॉलेज, चांडिल में मानवशास्त्र के स्थान पर संताली भाषा जोड़ने पर विचार।
बहरागोड़ा कॉलेज में मनोविज्ञान की जगह मुंडारी विषय प्रस्तावित।
जेएलएन कॉलेज, चक्रधरपुर में समाजशास्त्र की जगह कुरमाली विषय रखने का प्रस्ताव।
बहरागोड़ा और जेएलएन कॉलेज में ओड़िआ भाषा को टीआरएस से अलग करने पर चर्चा।
केएस कॉलेज, सरायकेला में गणित और कुरमाली विषय की सीटों के पुनर्निर्धारण पर मंथन।
जमशेदपुर वर्कर्स कॉलेज में कई विषयों की सीटों और फैकल्टी स्ट्रक्चर में बदलाव का प्रस्ताव।
कई कॉलेजों में पुरानी व्यवस्था ही रहेगी
जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज, जीएससीडब्ल्यू वर्कर्स महिला कॉलेज, एलबीएसएम कॉलेज करंडीह, जीसी जैन कॉमर्स कॉलेज चाईबासा, महिला कॉलेज सरायकेला, को-ऑपरेटिव लॉ कॉलेज समेत नए डिग्री और मॉडल कॉलेजों ने मौजूदा विषय व्यवस्था को यथावत रखने का निर्णय लिया है।
क्षेत्रीय भाषाओं को बचाने के लिए KU का बड़ा फैसला
बैठक में प्राचार्यों ने कहा कि कम नामांकन की वजह से कई स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को हटाने की स्थिति बन रही है। इस पर कुलपति प्रो. (डॉ.) अंजिला गुप्ता ने कहा कि विश्वविद्यालय इन विषयों को बचाने के लिए सरकार को विशेष अनुशंसा भेजेगा।
छात्रों के लिए जरूरी निर्देश
विश्वविद्यालय ने सभी कॉलेजों को निर्देश दिया है कि क्लस्टर सिस्टम और विषय संयोजन से जुड़ी पूरी जानकारी वेबसाइट पर अपलोड की जाए। साथ ही एडमिशन से पहले हेल्पलाइन नंबर जारी करने और ग्रामीण क्षेत्रों तक सूचना पहुंचाने के लिए अखबारों में प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है।