झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। सत्तारूढ़ गठबंधन ने एक सीट पर पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा के समर्थन का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद चुनावी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है।
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में नामांकन पत्र खरीदने वाले परिमल नथवानी और वी. विजयसाई रेड्डी को लेकर हो रही है। दोनों नेताओं की एंट्री ने चुनावी समीकरणों को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा चुनाव में किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को नामांकन दाखिल करने के लिए 10 प्रस्तावकों के हस्ताक्षर की जरूरत होती है। ऐसे में अब सभी की निगाहें 8 जून पर टिकी हैं, जब नामांकन दाखिल होने के साथ प्रस्तावकों के नाम सामने आएंगे।
वी. विजयसाई रेड्डी की संभावित दावेदारी को लेकर भी राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे रेड्डी हाल ही में सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की बात कह चुके हैं। ऐसे में झारखंड से उनके नामांकन फॉर्म खरीदने के पीछे की रणनीति को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं परिमल नथवानी का नाम लंबे समय से संभावित उम्मीदवार के रूप में चर्चा में रहा है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, नथवानी तभी चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे थे जब जीत के समीकरण उनके पक्ष में दिखाई दें। दूसरी ओर यह भी चर्चा है कि भाजपा 2014 की तरह इस बार भी नथवानी को समर्थन देने की रणनीति बना सकती है। हालांकि भाजपा ने अभी तक अपने आधिकारिक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। पार्टी नेता गौरव वल्लभ द्वारा नामांकन पत्र खरीदे जाने से भी अटकलों का दौर जारी है।
अब राज्यसभा चुनाव में असली तस्वीर नामांकन दाखिल होने के बाद ही साफ होगी। खासकर प्रस्तावकों के नाम सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्दलीय उम्मीदवारों के पीछे किस राजनीतिक दल या समूह का समर्थन मौजूद है।