झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा गड़बड़ी मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच तेज करते हुए शनिवार को दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इस हाई-प्रोफाइल मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या 10 हो गई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी के होटल कनेक्शन से पूरे सिंडिकेट के कई अहम राज सामने आ सकते हैं।
दो नए आरोपी गिरफ्तार
सीआईडी की ताजा कार्रवाई में गिरफ्तार आरोपियों की पहचान—
सोनू कुमार – JPSC का कर्मचारी
अरविंद कुमार – मुख्य आरोपी अभय तिवारी का करीबी सहयोगी
के रूप में हुई है। दोनों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसी अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाल रही है।
होटल कनेक्शन बना जांच का बड़ा आधार
जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी अभय तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी ने रांची में एक पूरा होटल लीज पर लिया था। आरोप है कि इसी होटल का इस्तेमाल परीक्षा से जुड़ी कथित अवैध बैठकों, सौदेबाजी और अन्य गतिविधियों के लिए किया जाता था।
सीआईडी ने होटल और अन्य ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डायरी, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। अधिकारियों का मानना है कि इनकी जांच से पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के नाम और भूमिका का खुलासा हो सकता है।
कौन है अभय तिवारी?
जांच के अनुसार, अभय तिवारी परीक्षा संचालन से जुड़ी आउटसोर्सिंग एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के रूप में कार्यरत था। वह वर्तमान में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (MO) के पद पर तैनात था।
सीआईडी को जांच में यह भी जानकारी मिली है कि उसने और उसके परिवार के कुछ सदस्यों ने संदिग्ध परिस्थितियों में कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। इन पहलुओं की भी जांच की जा रही है।
OMR हेरफेर और मनी ट्रेल पर फोकस
जांच एजेंसियां फिलहाल OMR शीट में संभावित हेरफेर, अवैध लेन-देन (मनी ट्रेल) और अभ्यर्थियों से वसूली के नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि सिंडिकेट अभ्यर्थियों से उनके मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा करवा लेता था, ताकि वे तय रकम देने से पीछे न हट सकें।
पहले भी हुई थीं कई गिरफ्तारियां
इससे पहले सीआईडी तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, TDPL के निदेशक रामवीर सिंह, कथित मास्टरमाइंड मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी, कंपनी के कई कर्मचारियों सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
जांच एजेंसियों का कहना है कि पूछताछ और जब्त दस्तावेजों के विश्लेषण के आधार पर आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।