झारखंड सरकार ने आगामी त्योहारों को देखते हुए सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना के तहत वस्त्र वितरण की प्रक्रिया तेज कर दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में राज्य के करीब 68 लाख गरीब परिवारों को साड़ी और धोती अथवा लुंगी उपलब्ध करायी जायेगी। खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय ने सभी जिलों के उपायुक्तों को इस संबंध में आवश्यक निर्देश भेजे हैं।

तीन दिन के भीतर जारी करना होगा आपूर्ति आदेश

निदेशालय ने निर्देश दिया है कि आपूर्ति आदेश मिलने के तीन दिनों के भीतर डीलरवार आपूर्ति आदेश जारी किया जाये, ताकि त्योहारों से पहले लाभुकों तक वस्त्र पहुंचाये जा सकें। नए आवंटन में वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में बचे अवितरित कपड़ों का भी हिसाब किया जायेगा। ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध वितरण आंकड़ों के आधार पर बची साड़ी, धोती और लुंगी की संख्या नये आवंटन से घटायी जायेगी।

मफतलाल इंडस्ट्रीज को मिला आपूर्ति का जिम्मा

वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली और दूसरी छमाही के लिए वस्त्रों की आपूर्ति का जिम्मा जेम पोर्टल के माध्यम से मेसर्स मफतलाल इंडस्ट्रीज लिमिटेड को दिया गया है। योजना के तहत एनएफएसए और झारखंड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के पात्र परिवारों को एक साड़ी और एक धोती अथवा लुंगी दी जायेगी। धोती और लुंगी का वितरण 60:40 के अनुपात में होगा।

31 अगस्त तक 83.60 फीसदी हुआ वितरण

खाद्य निदेशालय की 31 अगस्त 2026 तक की समीक्षा के अनुसार राज्य में वस्त्र वितरण का औसत 83.60 फीसदी रहा। राज्य औसत से बेहतर प्रदर्शन करने वाले 16 जिलों में लोहरदगा, खूंटी, लातेहार, दुमका, कोडरमा, पाकुड़, रामगढ़, जामताड़ा, देवघर, सिमडेगा, हजारीबाग, पलामू, चतरा, गुमला, गिरिडीह और साहिबगंज शामिल हैं। वहीं आठ जिलों का प्रदर्शन राज्य औसत से कम रहा है और वहां वितरण में तेजी लाने का निर्देश दिया गया है।

गुणवत्ता जांच के बाद ही होगा वितरण

वस्त्रों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए प्रखंड स्तर पर कपड़ों की शत-प्रतिशत प्राप्ति के 48 घंटे के भीतर बीडीओ द्वारा साड़ी, धोती और लुंगी के नमूने रैंडम आधार पर सीलबंद किये जायेंगे। इन्हें सरकारी प्रयोगशालाओं में गुणवत्ता जांच के लिए भेजा जायेगा। लैब रिपोर्ट सही आने के बाद ही लाभुकों के बीच वस्त्र वितरण शुरू किया जायेगा।

प्रति वस्त्र 10 रुपये लिये जायेंगे

योजना के तहत पीडीएस दुकानदार लाभुकों से प्रति वस्त्र 10 रुपये लेंगे। इसमें एक रुपये प्रति वस्त्र डीलर कमीशन और दो रुपये परिवहन खर्च के रूप में निर्धारित हैं। शेष सात रुपये प्रति वस्त्र की राशि जिला आपूर्ति पदाधिकारी के कार्यालय में जमा करायी जायेगी। वितरण प्रक्रिया की निगरानी के लिए पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर पर समितियां भी गठित की गयी हैं।