झारखंड में पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने को लेकर शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को बेड़ो और इटकी में ग्राम प्रधानों के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की शामिल हुए। कार्यक्रम में ग्रामसभा के अधिकारों, ग्राम स्वशासन और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा की गई। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए ग्राम प्रधानों और ग्रामसभा के सदस्यों को अधिकारों के साथ अपनी जिम्मेदारियों की जानकारी होना भी जरूरी है।
पेसा कानून आदिवासी समाज के स्वशासन का महत्वपूर्ण माध्यम
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि भूरिया समिति की अनुशंसाओं के आधार पर वर्ष 1996 में पेसा कानून बनाया गया था। इसका उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाजों, सामुदायिक अधिकारों और स्वशासन की परंपराओं को संरक्षण देना है। उन्होंने कहा कि झारखंड में 2 जनवरी 2026 को पेसा नियमावली लागू होना ग्रामसभाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने सवाल उठाया कि वर्ष 1996 में कानून बनने के बाद इसकी नियमावली तैयार होने में लगभग तीन दशक क्यों लग गए। इतने लंबे समय तक ग्राम प्रधानों और ग्रामसभाओं के सामने कानून के प्रावधानों तथा उनके इस्तेमाल को लेकर कई सवाल बने रहे। राज्य सरकार ने विभिन्न पक्षों के सुझावों और जमीनी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमावली लागू करने की पहल की।
गांव-गांव तक पहुंचानी होगी पेसा कानून की जानकारी
शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि केवल कानून बना देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके प्रावधानों की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी जरूरी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के पास अच्छी गाड़ी है, लेकिन उसे चलाना नहीं आता, तो उसकी उपयोगिता सीमित रह जाती है। इसी तरह, जब तक ग्राम प्रधानों और ग्रामसभा के सदस्यों को पेसा कानून की सही जानकारी नहीं होगी, तब तक इसके उद्देश्यों को पूरी तरह हासिल करना मुश्किल होगा।
उन्होंने गांव-गांव में जागरूकता अभियान चलाने और ग्रामसभाओं को उनके कानूनी अधिकारों के साथ कर्तव्यों से भी परिचित कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कानून के क्रियान्वयन में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को संवाद और जमीनी अनुभवों के आधार पर समझना चाहिए। जरूरत पड़ने पर सुधार की संभावनाओं पर भी विचार किया जाना चाहिए।
मंत्री ने कहा कि पेसा कानून केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की पहचान, परंपराओं, सामुदायिक अधिकारों और ग्राम स्वशासन को मजबूत करने का माध्यम है। ग्रामसभा को केवल औपचारिक संस्था बनाकर नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि उसे स्थानीय स्वशासन की सक्षम और प्रभावी इकाई के रूप में विकसित करना जरूरी है।
ग्राम प्रधान निष्पक्षता से करें अधिकारों का इस्तेमाल: बंधु तिर्की
पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने कहा कि पेसा कानून के तहत ग्रामसभाओं को मिले अधिकारों का सही और जिम्मेदारीपूर्ण इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ग्राम प्रधानों को गांव के हाट-बाजार, स्थानीय विवादों और खनन समेत कानून के दायरे में आने वाले विषयों पर ग्रामसभा की भूमिका और अधिकारों को समझना होगा।उन्होंने कहा कि ग्रामसभा की जिम्मेदारी किसी एक जाति, धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं है। गांव में रहने वाले सभी लोगों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना ग्रामसभा का दायित्व है। ग्राम प्रधानों को निष्पक्ष न्यायाधीश की तरह अपनी भूमिका निभानी चाहिए, ताकि किसी के साथ भेदभाव न हो।
बंधु तिर्की ने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। ग्राम प्रधानों को अपने अधिकारों का मनमाने तरीके से इस्तेमाल करने के बजाय संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप काम करना चाहिए। उन्होंने ग्राम प्रधानों से पेसा कानून की पुस्तक ध्यानपूर्वक पढ़ने और उसके सभी प्रावधानों को समझने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कानून की सफलता उसके प्रावधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांवों में उसके प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामसभाओं के सशक्तिकरण से तय होगी। जब ग्राम प्रधान और ग्रामसभा के सदस्य अपने अधिकारों एवं जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होंगे, तभी स्थानीय स्वशासन की व्यवस्था मजबूत होगी।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
बेड़ो के महादानी मैदान स्थित विवाह मंडप और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, इटकी के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर संजीव भगत, करमा उरांव, बेरोनिका उरांव, मोदशीर हक, रमेश महली, राजन किस्पोट्टा, अबूमाज, भोमा सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
बेड़ो के महादानी मैदान स्थित विवाह मंडप और अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, इटकी के सभागार में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर संजीव भगत, करमा उरांव, बेरोनिका उरांव, मोदशीर हक, रमेश महली, राजन किस्पोट्टा, अबूमाज, भोमा सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
