झारखंड में वित्त रहित अनुदानित स्कूल-कॉलेजों को अनुदान राशि देने में देरी का मामला सामने आया है। सख्त निर्देश के बावजूद राज्य के 19 जिलों में संबंधित शिक्षण संस्थानों को राशि नहीं मिलने की बात कही जा रही है। इसे लेकर शिक्षा विभाग ने संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) की जवाबदेही तय करने की तैयारी की है।

शिक्षण संस्थानों को समय पर अनुदान नहीं मिलने से वहां कार्यरत शिक्षकों और कर्मचारियों की परेशानी बढ़ रही है। इस मामले में शिक्षा विभाग भुगतान की स्थिति और देरी के कारणों का ब्योरा जुटाने में लगा है। विभाग की ओर से संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट मांगे जाने और लापरवाही सामने आने पर कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।

समय पर भुगतान नहीं होने से बढ़ी परेशानी

वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों को मिलने वाली राशि उनके संचालन और शिक्षकों-कर्मचारियों के हितों के लिए महत्वपूर्ण है। निर्धारित समय पर अनुदान का भुगतान नहीं होने से संस्थानों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। इस मामले को लेकर वित्त रहित शिक्षण संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी शिक्षा विभाग के समक्ष अपनी समस्याएं रखी हैं।

DEO की जवाबदेही तय करने की तैयारी

अनुदान भुगतान में देरी को लेकर जिला शिक्षा पदाधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जा रही है। विभाग यह पता लगाने की तैयारी में है कि राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान क्यों नहीं हुआ और किन स्तरों पर प्रक्रिया लंबित रही। संबंधित जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद जिम्मेदारी तय कर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

अनुदान से जुड़े अन्य मामले भी लंबित

वित्त रहित अनुदानित शिक्षण संस्थानों की ओर से अनुदान राशि में बढ़ोतरी और छात्राओं को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं। शिक्षा विभाग ने इन मामलों पर भी कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब संबंधित संस्थानों को लंबित राशि मिलने और भुगतान प्रक्रिया में तेजी आने का इंतजार है।