झारखंड में बंद और सक्रिय कोयला खदानों से निकलने वाले पानी को शुद्ध कर पेयजल के रूप में उपयोग करने की दिशा में एक बड़ी पहल की गई है। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने गुरुवार को वर्चुअल माध्यम से ‘कोल नीर’ (Coal NEER) परियोजना के तहत स्थापित वॉटर बॉटलिंग प्लांट्स का उद्घाटन किया। इस परियोजना का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है।
चतरा और धनबाद में स्थापित हुए प्लांट
परियोजना के तहत झारखंड के चतरा जिले के पिपरवार (सीसीएल बचरा क्षेत्र) और धनबाद के पुटकी-बलिहारी (बीसीसीएल पीबी क्षेत्र) में अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इन प्लांट्स में खदानों से निकलने वाले पानी को उन्नत तकनीक के जरिए शुद्ध कर पेयजल में बदला जाएगा।
महिला समूह संभालेंगे संचालन
‘कोल नीर’ परियोजना की खास बात यह है कि इसके संचालन और प्रबंधन की जिम्मेदारी स्थानीय महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपी गई है। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
आधुनिक तकनीक से होगा शुद्धिकरण
प्लांट में रिवर्स ऑस्मोसिस (RO) और अन्य उन्नत जल शोधन तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे खदानों के पानी को पूरी तरह सुरक्षित और पेय योग्य बनाया जा सके। धनबाद स्थित प्लांट को लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया है।
सस्ती दर पर मिलेगा शुद्ध पानी
परियोजना के तहत स्थानीय लोगों को महज 5 रुपये में 20 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है। इसके अलावा ‘कोल नीर’ ब्रांड नाम से 250 मिलीलीटर, 500 मिलीलीटर और 1 लीटर की बोतलों में भी पानी की पैकेजिंग की जाएगी।
पहले चरण में कोल कंपनियों को आपूर्ति
प्रारंभिक चरण में इस शुद्ध पानी की आपूर्ति कोल कंपनियों के कार्यालयों, बैठकों और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों में की जाएगी। बाद में इसे आम लोगों के लिए बाजार में भी उपलब्ध कराने की योजना है।
‘वेस्ट टू वेल्थ’ विजन को मिलेगा बढ़ावा
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और मिशन लाइफ (LiFE) अभियान के अनुरूप मानी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना खनन क्षेत्रों में जल संसाधनों के बेहतर उपयोग और सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

