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राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में दीपिका पांडेय सिंह ने उठाई झारखंड की आवाज, मनरेगा से लेकर आवास योजना तक रखीं कई मांगें

झारखंड की ग्रामीण विकास, ग्रामीण कार्य एवं पंचायती राज मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में राज्य का पक्ष मजबूती से रखा। सम्मेलन के दूसरे दिन उन्होंने महात्मा गांधी के नाम से नई जनहित योजना शुरू करने, मनरेगा के लिए पर्याप्त बजट, बकाया राशि के भुगतान, प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बढ़ाने और न्यूनतम मजदूरी में वृद्धि सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने झारखंड के सुझावों पर सकारात्मक पहल का भरोसा दिया।

मंत्री ने कहा कि वीबी ग्राम जी योजना से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से महात्मा गांधी के नाम से नई योजना शुरू करने की मांग की। साथ ही मनरेगा के तहत 100 दिनों के बजाय 125 दिनों के रोजगार के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और केंद्र-राज्य की 60:40 हिस्सेदारी से झारखंड जैसे राज्यों पर बढ़ने वाले आर्थिक बोझ का मुद्दा भी उठाया।

दीपिका पांडेय सिंह ने प्रधानमंत्री आवास योजना की सहायता राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये करने और समय पर आवास निर्माण सुनिश्चित करने के लिए मजबूत फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर वाले आवास बनाने का सुझाव दिया। उन्होंने अबुआ आवास योजना के निर्माण में मनरेगा के तहत 90 दिनों की मजदूरी भुगतान की भी मांग रखी। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाया।

सम्मेलन में मंत्री ने मनरेगा के मटेरियल मद में झारखंड के लगभग 900 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भुगतान लंबित रहने से ग्रामीण विकास योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। साथ ही मनरेगा मजदूरों की वर्तमान मजदूरी 282 रुपये से बढ़ाकर 433 रुपये प्रतिदिन करने की मांग भी रखी।

इसके अलावा उन्होंने झारखंड में रूरल इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य की करीब 32 लाख स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ी महिलाएं आजीविका और उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। यदि ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा मिले और उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंच मिले तो झारखंड की महिलाएं आर्थिक सशक्तिकरण का नया इतिहास रच सकती हैं।

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