झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कथित जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है। रांची की विशेष PMLA अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज करते हुए मामले में आगे की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद अब उनके खिलाफ आरोप तय करने और ट्रायल की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सह विशेष PMLA न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। ऐसे में इस स्तर पर आरोपी को आरोपमुक्त नहीं किया जा सकता।
यह मामला रांची के बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और उससे संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच से जुड़ा है। इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) कर रहा है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिसंबर 2025 में अदालत में डिस्चार्ज याचिका दाखिल कर दावा किया था कि विवादित जमीन का किसी अनुसूचित अपराध से सीधा संबंध नहीं है और न ही वह जमीन उनके नाम पर दर्ज है। उनके पक्ष की ओर से यह भी कहा गया था कि ED के पास आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं।
वहीं ED ने अदालत में याचिका का विरोध करते हुए कहा कि जांच के दौरान एकत्र किए गए दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त हैं। एजेंसी ने यह भी तर्क दिया कि डिस्चार्ज याचिका की सुनवाई के दौरान मामले का विस्तृत परीक्षण नहीं किया जा सकता।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने ED के तर्कों को स्वीकार करते हुए याचिका खारिज कर दी। अब मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और नियमित ट्रायल शुरू होगा।
कानूनी जानकारों के अनुसार, विशेष अदालत के इस आदेश को चुनौती देने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने का विकल्प उपलब्ध है।