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क्या अब सफ्ताह में तीन दिन धनबाद के बजाए गिरिडीह होकर चलेगी गया-हावड़ा वंदे भारत एक्सप्रेस !

हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस के रूट में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कोडरमा की सांसद सह केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी को आश्वासन दिया है कि यह हाई-स्पीड ट्रेन सप्ताह में तीन दिन धनबाद के बजाय न्यू गिरिडीह रेलवे स्टेशन होकर चलाई जाएगी। इस फैसले से गिरिडीह, पारसनाथ और कोडरमा क्षेत्र को आधुनिक रेल सेवा का सीधा लाभ मिलने की संभावना है।

यह आश्वासन मंगलवार को नई दिल्ली में उस समय दिया गया, जब गिरिडीह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री से मुलाकात की। बैठक में गिरिडीह और आसपास के क्षेत्रों से जुड़ी रेलवे अवसंरचना, यात्री सुविधाओं और माल ढुलाई से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। जेडआरयूसीसी सदस्य मुकेश जलान ने बताया कि बैठक में हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन दिन न्यू गिरिडीह होकर चलाने पर सहमति बनी है।

गिरिडीह को लाभ, धनबाद के लिए झटका? राजनीतिक और क्षेत्रीय असर

फिलहाल हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन धनबाद होकर चलती है। यदि प्रस्ताव लागू होता है, तो यह ट्रेन सप्ताह में केवल तीन दिन ही धनबाद होकर चलेगी, जबकि शेष तीन दिन मधुपुर–न्यू गिरिडीह–कोडरमा रूट से संचालित होगी। इससे धनबाद के रेल यात्रियों को झटका लग सकता है और स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

गौरतलब है कि 15 सितंबर 2024 को हावड़ा–गया के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुआ था और यह धनबाद होकर चलने वाली एकमात्र वंदे भारत ट्रेन है। यात्रियों की मांग इसे वाराणसी तक विस्तारित करने की थी, लेकिन विस्तार के बजाय इसके फेरे कम करने और रूट बदलने की चर्चा ने राजनीतिक रंग ले लिया है। माना जा रहा है कि इससे धनबाद के सांसद ढुलू महतो की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, जबकि केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के प्रभाव को क्षेत्र में मजबूती मिलेगी।

धार्मिक और औद्योगिक कॉरिडोर की दलील, रेल राजस्व बढ़ने की उम्मीद

बैठक में देवघर–जसीडीह–वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस को भी न्यू गिरिडीह–कोडरमा होकर सप्ताह में तीन दिन चलाने का प्रस्ताव रखा गया। इसका उद्देश्य बाबाधाम, काशी विश्वनाथ और पारसनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को जोड़ते हुए एक मजबूत आध्यात्मिक रेल कॉरिडोर विकसित करना बताया गया।

इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल ने न्यू गिरिडीह स्टेशन को लॉजिस्टिक हब के रूप में विकसित करने, रैक प्वाइंट विस्तार, अतिरिक्त माल ढुलाई सुविधा और गिरिडीह–कोडरमा–मधुपुर रेलखंड पर डबल लाइन की मांग भी रखी। प्रतिनिधियों ने गिरिडीह की औद्योगिक और खनिज संपदा—कोयला, अभ्रक, स्टोन चिप्स और डोलोमाइट—का हवाला देते हुए कहा कि बेहतर रेल अवसंरचना से रेलवे के राजस्व में वृद्धि के साथ-साथ रोजगार और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

रेल मंत्री के सकारात्मक रुख पर गिरिडीह चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने आभार जताया, वहीं अब सभी की नजरें इस पर टिकी हैं कि हावड़ा–गया वंदे भारत एक्सप्रेस के रूट में बदलाव को लेकर अंतिम अधिसूचना कब जारी होती है और इसका राजनीतिक व यात्री प्रभाव किस दिशा में जाता है।

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