झारखंड के ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के हाड़ात गांव में जंगली हाथियों के हमले में मां-बेटी की दर्दनाक मौत के बाद सियासत तेज हो गई है। हरे लाल महतो ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि इस हमले में 13 वर्षीय बच्ची और उसकी मां की जान चली गई, जबकि दो बुजुर्ग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसे उन्होंने महज हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। उन्होंने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
महतो ने सवाल उठाया कि आखिर कब तक ग्रामीण हाथी-मानव संघर्ष का शिकार होते रहेंगे। उनका कहना है कि हर बार घटना के बाद सिर्फ मुआवजा देना समाधान नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार और स्थानीय विधायक इस गंभीर समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में न तो समय पर अलर्ट सिस्टम है और न ही रात में वन विभाग की प्रभावी निगरानी। साथ ही विधायक निधि से उपलब्ध कराई गई एम्बुलेंस की उपलब्धता पर भी सवाल उठाए गए।
शनिवार को महतो ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गांव पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और आर्थिक सहायता प्रदान की। उन्होंने वन विभाग से हाथियों पर नियंत्रण, सुरक्षा बढ़ाने और स्थायी समाधान की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो उनकी पार्टी जनहित में आंदोलन करेगी।