रांची: झारखंड पुलिस के नक्सल विरोधी अभियान ‘ऑपरेशन नवजीवन-2’ के तहत बड़ी सफलता मिली है। कुल 60 लाख रुपये के इनामी 16 सक्रिय माओवादी ने रांची स्थित पुलिस मुख्यालय में डीजीपी तदाशा मिश्रा के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस के अनुसार, सुरक्षा बलों के लगातार दबाव और संगठन के भीतर शोषण से तंग आकर इन नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले 16 नक्सलियों में 14 सदस्य शीर्ष नक्सली कमांडर मिसिर बेसरा और असीम मंडल के नेटवर्क से जुड़े थे। इसे नक्सली संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सली
संतोष उर्फ बसुदेव उर्फ गांधी (रीजनल कमांडर) – ₹15 लाख का इनामी, 128 मामलों में वांछित।
चंदन लोहरा (जोनल कमांडर) – ₹10 लाख का इनामी, 78 मामलों में वांछित।
अश्विन (जोनल कमांडर) – ₹10 लाख का इनामी।
तीन सब-जोनल कमांडर (प्रत्येक पर ₹5 लाख का इनाम)।
छह एरिया कमांडर (प्रत्येक पर ₹2 लाख का इनाम)।
तीन दस्ता सदस्य, जिनमें कुल पांच महिला नक्सली भी शामिल हैं।
पुलिस को मिले अत्याधुनिक हथियार
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों को बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद सौंपे, जिनमें शामिल हैं:
6 INSAS राइफल
2 AK-47 राइफल
1 HK-33 राइफल
1 US कार्बाइन
1 M-16 राइफल
38 मैगजीन
1,562 जिंदा कारतूस
मिसिर बेसरा पर बढ़ा दबाव
झारखंड पुलिस, CRPF, कोबरा और झारखंड जगुआर की संयुक्त कार्रवाई से कोल्हान और सारंडा क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियां लगातार सिमट रही हैं। हाल ही में मिसिर बेसरा के कई करीबी सहयोगियों की गिरफ्तारी और अब 16 सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण को संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और मुख्यधारा में लौटने के इच्छुक नक्सलियों का स्वागत किया जाएगा, जबकि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।