झारखंड के बहुचर्चित अलकतरा (बिटुमेन) घोटाले से जुड़े दशकों पुराने मामले में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने ठेकेदार झमन प्रसाद को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण छह अभियुक्त इंजीनियरों को बरी कर दिया गया।
सीबीआई के विशेष न्यायाधीश कुलदीप की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने ठेकेदार झमन प्रसाद पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना राशि जमा नहीं करने की स्थिति में उन्हें छह महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
मामला अविभाजित बिहार के दौर में हुए अलकतरा गबन और फर्जीवाड़े से जुड़ा है, जिसने उस समय राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में व्यापक चर्चा बटोरी थी। जांच के बाद सीबीआई ने इस मामले में कई अभियुक्तों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
अदालत ने सुनवाई के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण किया। इसके आधार पर ठेकेदार को दोषी पाया गया, जबकि छह इंजीनियरों के खिलाफ आरोप सिद्ध करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले। बरी किए गए अभियुक्तों में पांच इंजीनियर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि एक वर्तमान में गोड्डा पथ प्रमंडल में कार्यरत हैं।
सीबीआई कोर्ट के इस फैसले को अलकतरा घोटाले से जुड़े लंबित मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है।
