झारखंड अब देश के उन राज्यों की सूची में शामिल हो गया है, जहां जरूरत से अधिक बिजली उपलब्ध है। दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन चालू होने के बाद झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) के पास करीब 500 मेगावाट सरप्लस बिजली उपलब्ध हो गई है। इससे अब पीक आवर में होने वाली लोड शेडिंग की समस्या से लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अब तक ट्रांसमिशन लाइन की कमी के कारण एनटीपीसी के नॉर्थ कर्णपुरा प्लांट से झारखंड अपने हिस्से की पूरी बिजली नहीं ले पा रहा था। नई संचरण लाइन शुरू होने के बाद राज्य को पर्याप्त बिजली मिलने लगी है।

झारखंड के पास अब 2800 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध

झारखंड ऊर्जा संचरण निगम के प्रबंध निदेशक केके वर्मा के अनुसार, पहले पीक आवर में राज्य को 200 से 300 मेगावाट अतिरिक्त बिजली ऊंची कीमत पर खरीदनी पड़ती थी। लेकिन अब इसकी जरूरत नहीं पड़ेगी। वर्तमान में झारखंड के पास लगभग 2800 मेगावाट तक बिजली उपलब्ध है।

संताल और धनबाद-बोकारो क्षेत्र को होगा बड़ा फायदा

दुमका-गोविंदपुर ट्रांसमिशन लाइन शुरू होने से दुमका क्षेत्र को करीब 103 मेगावाट और गोविंदपुर ग्रिड सब स्टेशन को लगभग 50 मेगावाट बिजली मिल रही है। अगले दो दिनों में यह क्षमता बढ़कर करीब 450 मेगावाट तक पहुंचने की संभावना है।

इससे दुमका, साहेबगंज, पाकुड़, देवघर, गिरिडीह, धनबाद और बोकारो समेत कई जिलों में बिजली आपूर्ति बेहतर होगी। इन इलाकों में पहले अक्सर लोड शेडिंग की समस्या बनी रहती थी।

नॉर्थ कर्णपुरा से झारखंड को मिल रही 660 मेगावाट बिजली

नॉर्थ कर्णपुरा परियोजना से झारखंड के हिस्से में 660 मेगावाट बिजली मिल रही है। हालांकि ट्रांसमिशन लाइन नहीं होने के कारण राज्य पूरी क्षमता से बिजली नहीं ले पा रहा था। अब गोविंदपुर-दुमका ग्रिड को जोड़ दिए जाने के बाद पूरी क्षमता से बिजली आपूर्ति संभव हो सकेगी।