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रांची में कैबिनेट बैठक: फ्लाईओवर से लेकर शिक्षा और पेंशन तक कई बड़े फैसलों पर मुहर

झारखंड मंत्रालय, रांची में 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा, आधारभूत संरचना और कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

बैठक में न्यायालय के आदेशों के आलोक में यह निर्णय लिया गया कि जिन कर्मचारियों की नियमित सेवा 10 वर्ष से कम है, उनकी दैनिक वेतनभोगी अवधि को जोड़कर पेंशन का लाभ दिया जाएगा। यह फैसला कई मामलों में लागू होगा, जिससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को राहत मिलेगी।

राज्य में आधारभूत संरचना को मजबूत करने के लिए दो बड़े फ्लाईओवर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई। पहला प्रोजेक्ट अरगोड़ा चौक से हरमू होते हुए डिबडीह ब्रिज तक एलिवेटेड रोड का है, जिसकी लंबाई करीब 3.804 किमी होगी और इस पर लगभग 469 करोड़ रुपये खर्च होंगे। वहीं करमटोली से साइंस सिटी तक 3.216 किमी लंबे फ्लाईओवर निर्माण के लिए करीब 351 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।

शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए “स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड अथॉरिटी” के गठन को मंजूरी मिली है। साथ ही झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा नियमावली-2026 को भी स्वीकृति प्रदान की गई।

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के तहत मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना और ग्राम सेतु योजना के अंतर्गत सड़कों और पुलों के निर्माण को हरी झंडी दी गई।

इसके अलावा, पलामू स्थित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में इनोवेशन और इनक्यूबेशन सेंटर की स्थापना को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना के तहत पांच वर्षों में लगभग 22.97 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और चार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे।

कैबिनेट ने कुछ मामलों में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों के सेवा नियमितीकरण को भी मंजूरी दी है, जिससे उन्हें सरकारी सेवा का लाभ मिलेगा। वहीं एक सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी के पेंशन निर्धारण को भी उच्च वेतनमान के अनुसार स्वीकृति दी गई।

गढ़वा जिले के “श्री बंशीधर नगर” अनुमंडल का नाम आंशिक रूप से बदलकर “श्री बंशीधर नगर उंटारी” करने का भी निर्णय लिया गया।

तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए राज्य सरकार ने AI इनोवेशन और एडॉप्शन को बढ़ावा देने के लिए Google LLC के साथ समझौता (MoU) करने को मंजूरी दी है।

साथ ही, राज्य के प्रतिभाशाली छात्रों को विदेश में उच्च शिक्षा के लिए हर साल छात्रवृत्ति देने का फैसला भी लिया गया है। इसके तहत अधिकतम 50 छात्रों को मास्टर्स कोर्स के लिए सहायता मिलेगी।

इन सभी फैसलों को राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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