रांची। नए साल की शुरुआत झारखंड के हजारों युवाओं के लिए राहत और उम्मीद की खबर लेकर आई है। वर्षों के इंतजार, कानूनी उलझनों और विवादों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में कुल 1910 अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा में प्रवेश का अवसर मिला।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंच से स्वयं 26 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस मौके पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी और उनके परिजन मौजूद रहे। नियुक्ति पत्र मिलने के साथ ही अभ्यर्थियों का वह संघर्ष समाप्त हुआ, जो लगभग एक दशक पहले शुरू हुआ था।
किसे-किस पद पर मिली नियुक्ति
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा आयोजित सीजीएल परीक्षा के माध्यम से विभिन्न विभागों में नियुक्तियां की गई हैं। चयनित पदों में सहायक प्रशाखा पदाधिकारी के सबसे अधिक 847 पद शामिल हैं। इसके अलावा
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प्रखंड कल्याण पदाधिकारी – 191
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प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी – 239
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श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी – 170
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अंचल निरीक्षक सह कानूनगो – 178
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कनीय सचिवालय सहायक – 288
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प्लानिंग असिस्टेंट – 4
इन सभी पदों को मिलाकर कुल 1910 नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार चरणबद्ध तरीके से पारदर्शी प्रक्रिया के तहत नियुक्तियां कर रही है और आने वाले समय में भी युवाओं को रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।
“कहने में नहीं, करने में विश्वास रखते हैं”
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार केवल घोषणाओं में नहीं, बल्कि काम करके दिखाने में विश्वास रखती है। उन्होंने कहा,
“सरकार के पहले ही वर्ष में हमने नौ हजार से अधिक युवाओं को नियुक्ति पत्र देकर एक मजबूत लकीर खींची। वह नजारा आज भी लोगों को याद है, जब बड़ी संख्या में युवा नियुक्ति पत्र लेने पहुंचे थे।”
मुख्यमंत्री ने अभ्यर्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष कर यह सफलता हासिल की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भर्ती प्रक्रिया को रोकने के लिए कई बार साजिशें की गईं और कोर्ट-कचहरी के नाम पर कुछ लोगों ने अभ्यर्थियों से चंदा तक वसूला। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि भविष्य में ऐसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विवादों और मुकदमों से भरा सीजीएल परीक्षा का सफर
सीजीएल परीक्षा का इतिहास विवादों और देरी से भरा रहा है। इसकी शुरुआत 28 दिसंबर 2015 को विज्ञापन जारी होने के साथ हुई थी। वर्ष 2016 में प्रारंभिक परीक्षा और परिणाम तो घोषित हो गए, लेकिन मुख्य परीक्षा तकनीकी और गैर-तकनीकी पदों को एक साथ जोड़ने के कारण अटक गई।
इस मुद्दे को लेकर अभ्यर्थी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे। अलग-अलग फैसलों और याचिकाओं के बाद अंततः सरकार को पूरा विज्ञापन ही वापस लेना पड़ा। इसके बाद 2017 में नए सिरे से आवेदन लिए गए और 2018–2019 में परीक्षा की तैयारी हुई, लेकिन आरक्षण नीति में बदलाव और नियमावली संबंधी विवादों के कारण परीक्षा फिर टलती रही।
2021 को नियुक्ति वर्ष घोषित किया गया, लेकिन 2022 में हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद पूरी वैकेंसी रद्द करनी पड़ी। इसके बाद 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसे पेपर लीक के आरोपों के कारण रद्द करना पड़ा। अगस्त–सितंबर 2024 में पुनः परीक्षा हुई, जिसके बाद अब जाकर नियुक्ति पत्र वितरित किए जा सके।
भविष्य की नियुक्तियों का संकेत
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में शांति, सौहार्द और विकास के माहौल में रोजगार सृजन सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले समय में विभिन्न विभागों में और भी नियुक्तियां की जाएंगी, ताकि राज्य के युवाओं को अपने ही प्रदेश में अवसर मिल सके।

