झारखंड की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। राज्य की सत्ताधारी गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस अब अपनी ही सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरने की तैयारी में है। पार्टी ने भ्रष्टाचार, महंगाई और जनसमस्याओं को लेकर आंदोलन करने का फैसला लिया है, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार बनने के बाद भी आम जनता की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है। बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जनता लगातार परेशान है। ऐसे में पार्टी अब जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन करेगी।
13 मई से धनबाद से आंदोलन की शुरुआत
जानकारी के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत 13 मई 2026 से धनबाद जिले से होगी। धनबाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष संतोष कुमार सिंह के निर्देश पर जिले के सभी प्रखंड और नगर मुख्यालयों में एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा।
धरना के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने के साथ-साथ जनसमस्याओं के समाधान की मांग करेंगे।
भ्रष्टाचार और महंगाई बना बड़ा मुद्दा
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि राज्य में भ्रष्टाचार लगातार बढ़ रहा है और आम लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। वहीं महंगाई ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण जनता की समस्याओं की अनदेखी हो रही है। इसी वजह से पार्टी को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ रहा है।
कांग्रेस में बढ़ रही अंदरूनी नाराजगी
राज्य कांग्रेस के भीतर भी इन दिनों असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली और हाल ही में हुई संगठनात्मक नियुक्तियों को लेकर कई वरिष्ठ नेता नाराज बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के अंदर गुटबाजी और अंतर्कलह भी लगातार बढ़ रही है। कई नेताओं का मानना है कि संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने से पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ी है।
गठबंधन सरकार पर बढ़ सकता है दबाव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के इस कदम से झारखंड की गठबंधन सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। विपक्ष भी लगातार सरकार को घेरने में जुटा है और अब सहयोगी दल का ही विरोध प्रदर्शन सरकार के लिए नई चुनौती बन सकता है।
हालांकि अभी तक झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) या गठबंधन सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

