झारखंड मंत्रालय, रांची में 28 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकार की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में आपदा प्रबंधन से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा कर अहम निर्णय लिए गए।
बैठक में “अदर डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोग्राम (ODMP)” के तहत कार्यरत जिला आपदा प्रबंधन पदाधिकारियों और क्षमता संवर्धन पदाधिकारियों की सेवा अवधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ाने की मंजूरी दी गई।
आपदा में मृत लोगों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि की प्रक्रिया को सरल बनाने का निर्णय लिया गया। अब मृतक के परिजनों को उनके गृह जिले के उपायुक्त द्वारा घटना का सत्यापन कर अनुदान राशि दी जाएगी, जिससे प्रक्रिया तेज और पारदर्शी होगी।
सरकार ने यह भी तय किया कि अनुग्रह राशि के दोहरे भुगतान को रोकने के लिए सत्यापन अनिवार्य होगा। साथ ही, यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी योजना के तहत बीमित है, तो वह या तो बीमा राशि ले सकेगा या आपदा प्रबंधन के तहत मिलने वाला अनुग्रह अनुदान—दोनों में से केवल एक ही विकल्प मिलेगा।
बैठक में सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों के आश्रितों को मिलने वाली सहायता राशि को बढ़ाकर 4 लाख रुपये करने का बड़ा फैसला लिया गया। पहले यह राशि केवल 1 लाख रुपये थी।
युवा आपदा मित्र योजना, जो दुमका, गोड्डा, पाकुड़ और साहिबगंज जिलों में चल रही है, उसे और मजबूत करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत स्वयंसेवकों का डेटाबेस तैयार कर उसे इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम (ERSS) से जोड़ा जाएगा, ताकि आपात स्थिति में तुरंत सहायता ली जा सके। मुख्यमंत्री ने इसके लिए SOP तैयार करने और स्वयंसेवकों को भत्ता देने पर भी विचार करने के निर्देश दिए।
राज्य में डूबने से होने वाली मौतों को देखते हुए गोताखोरों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया गया। फिलहाल 48 गोताखोरों को प्रशिक्षण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। साथ ही पुलिस और गृहरक्षकों के साथ महिलाओं को भी इसमें शामिल करने की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

