झारखंड में संगठित अपराध और रंगदारी के नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. राज्य के दो चर्चित गैंगस्टर राहुल सिंह और राहुल दुबे के खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया है. पुलिस मुख्यालय के आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है. बताया जा रहा है कि दोनों अपराधी फिलहाल विदेश में छिपे हुए हैं और वहीं से झारखंड में रंगदारी, धमकी और गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए अपने नेटवर्क का संचालन कर रहे हैं.
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी तलाश तेज होगी. झारखंड पुलिस की कोशिश है कि विदेश में छिपे इन अपराधियों को गिरफ्तार कर कानूनी प्रक्रिया के तहत भारत लाया जाये.
विदेश से चला रहे थे रंगदारी का नेटवर्क
पुलिस जांच के अनुसार, राहुल सिंह और राहुल दुबे विदेश में रहकर स्थानीय अपराधियों, शूटरों और हथियार सप्लायरों के संपर्क में थे. इनके निशाने पर मुख्य रूप से बड़े कारोबारी, कोयला व्यापारी, ठेकेदार और कंस्ट्रक्शन कंपनियां रहती थीं. आरोप है कि रंगदारी या लेवी नहीं देने पर निर्माण स्थलों और कारोबारियों को निशाना बनाकर फायरिंग करायी जाती थी.
दोनों के विदेश में रहने के कारण पुलिस के लिए सीधे उन तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था. अब इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से उनकी तलाश की जा सकेगी.
अमन साहू के एनकाउंटर के बाद राहुल सिंह ने संभाली गिरोह की कमान
राहुल सिंह पहले झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू के गिरोह से जुड़ा हुआ था. वह गिरोह में अहम भूमिका निभाता था. मार्च 2025 में पुलिस मुठभेड़ में अमन साहू के मारे जाने के बाद राहुल सिंह ने कथित तौर पर गिरोह की कमान संभाल ली.
बताया जाता है कि उसका नेटवर्क रांची, रामगढ़, पलामू, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और लातेहार समेत कई जिलों में फैला हुआ है. इन इलाकों में कोयला कारोबार, औद्योगिक गतिविधियों और निर्माण कार्यों से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के आरोप हैं.
हजारीबाग होटल फायरिंग और रांची एनकाउंटर में राहुल दुबे का नाम
दूसरी ओर, राहुल दुबे का गिरोह भी झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है. 29 अक्टूबर की रात हजारीबाग के मटवारी स्थित एके इंटरनेशनल होटल पर ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना हुई थी. घटना के बाद सोशल मीडिया पर राहुल दुबे के नाम से पोस्ट कर इसकी जिम्मेदारी लेने और होटल संचालक को धमकी देने का दावा किया गया था.
इसके बाद रांची पुलिस ने 30 अक्टूबर को कार्रवाई करते हुए एक मुठभेड़ के बाद गिरोह के पांच कथित शूटरों और मुख्य हथियार सप्लायर जियाउल हबीब को गिरफ्तार किया. पुलिस की इस कार्रवाई को गिरोह के स्थानीय नेटवर्क पर बड़ी चोट के रूप में देखा जा रहा है.
लोकल नेटवर्क तोड़ने के बाद अब सरगनाओं पर नजर
झारखंड पुलिस की रणनीति पहले स्थानीय स्तर पर सक्रिय शूटरों, हथियार सप्लायरों और मददगारों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की है. इसके बाद विदेश में छिपे मुख्य सरगनाओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है.
इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने के बाद संबंधित सदस्य देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियां दोनों अपराधियों का पता लगाने और अपने कानून के तहत उन्हें अस्थायी रूप से गिरफ्तार करने में सहयोग कर सकती हैं. इसके बाद भारत सरकार प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा सकती है. हालांकि, रेड कॉर्नर नोटिस अपने आप में अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट नहीं होता है.

