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झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: भांग NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं

भांग NDPS एक्ट के तहत प्रतिबंधित नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने 7 साल की सजा की रद्द

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने सुनील कुमार सिंह बनाम झारखंड राज्य मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि भांग (Bhang) एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत प्रतिबंधित मादक पदार्थ नहीं है। अदालत ने इस आधार पर निचली अदालत द्वारा सुनाई गई 7 साल के कठोर कारावास और ₹50,000 जुर्माने की सजा को रद्द करते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

क्या है मामला?

साल 2000 में जमशेदपुर बस स्टैंड से पुलिस ने सुनील कुमार सिंह को गिरफ्तार कर उनके पास से 11 किलोग्राम संदिग्ध मादक पदार्थ बरामद किया था। शुरुआती जांच में इसे गांजा माना गया, लेकिन फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट में बरामद पदार्थ भांग निकला।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कहा कि NDPS Act की धारा 2(iii) में ‘कैनबिस (हेम्प)’ की परिभाषा में गांजा और चरस शामिल हैं, लेकिन भांग को इसमें शामिल नहीं किया गया है। इसलिए केवल भांग रखने के आधार पर NDPS एक्ट के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने के लिए कोई वैज्ञानिक साक्ष्य पेश नहीं कर सका कि जब्त की गई भांग को चरस या गांजे की सहायता से तैयार किया गया था।

राज्य सरकार की अधिसूचना भी नहीं

कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी उल्लेख किया कि झारखंड सरकार ने भांग के कब्जे या सेवन पर रोक लगाने के लिए कोई अलग अधिसूचना या नियम जारी नहीं किया है।

कोर्ट का निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कैनबिस की अवैध खेती NDPS एक्ट के तहत दंडनीय है, लेकिन इस मामले में खेती का कोई आरोप नहीं था और जब्त पदार्थ केवल भांग था। ऐसे में आरोपी को NDPS एक्ट के तहत दोषी ठहराना कानूनन सही नहीं था। अदालत ने आरोपी को सभी बेल बॉन्ड और जमानती दायित्वों से भी मुक्त कर दिया।

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