झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 के कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान राज्य के विभिन्न जिलों में हुई कथित अवैध पेड़ कटाई के मामले में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने इस मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) द्वारा चार साल बाद भी जांच पूरी नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई।
न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति संजय प्रसाद की खंडपीठ ने जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान पूछा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर शुरू हुई जांच अब तक अधूरी क्यों है। अदालत ने मामले में किसी बड़ी साजिश (Larger Conspiracy) की आशंका भी जताई।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि मूल शिकायत में जामताड़ा, पलामू, पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) और रांची समेत कई जिलों में बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ कटाई का आरोप था, लेकिन CID की जांच केवल पलामू के पांकी क्षेत्र तक सीमित दिखाई दे रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच में जानबूझकर देरी कर प्रभावशाली लोगों और भ्रष्ट अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मामले की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करते हुए दो सप्ताह के भीतर अद्यतन स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान झारखंड के कई आरक्षित वनों से बड़ी संख्या में कीमती पेड़ों की अवैध कटाई की गई थी। आरोप है कि बिना वैध दस्तावेजों के 200 से अधिक ट्रकों के माध्यम से लकड़ियां राज्य से बाहर भेजी गईं। मामले में वन विभाग के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता भी सामने आई है। सरकार के अनुसार, कुछ वन अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और कुछ की गिरफ्तारी भी हुई है।

