झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार को बड़ा झटका देते हुए झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा-2024 को रद्द करने के सरकार के फैसले को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने सरकार के इस निर्णय को अनुचित और अन्यायपूर्ण करार दिया है। अदालत के इस फैसले से परीक्षा में चयनित 1,932 अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।
शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से जारी परीक्षा रद्द करने संबंधी अधिसूचना को निरस्त कर दिया। इससे उन अभ्यर्थियों के बीच राहत की उम्मीद जगी है, जिनकी नियुक्ति और नौकरी का भविष्य सरकार के फैसले के बाद अधर में लटक गया था।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, झारखंड में वर्ष 2024 में JSSC-CGL परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के आयोजन और परिणाम को लेकर कथित अनियमितताओं तथा पेपर लीक के आरोप सामने आए थे। इसे लेकर राज्यभर में अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया था। छात्रों ने परीक्षा में गड़बड़ी की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
इसके बाद राज्य सरकार ने 18 अगस्त को JSSC-CGL परीक्षा-2024 को रद्द करने का फैसला लिया था। सरकार का तर्क था कि परीक्षा में बड़े स्तर पर गड़बड़ी और पेपर लीक के सबूत मिले हैं। हालांकि, सरकार के इस फैसले से असंतुष्ट चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
अब हाईकोर्ट ने सरकार की अधिसूचना को निरस्त करते हुए परीक्षा रद्द करने के फैसले को अनुचित और अन्यायपूर्ण बताया है।
अभ्यर्थियों ने कोर्ट में क्या दी दलील?
सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाले अभ्यर्थियों की ओर से अदालत में दलील दी गई थी कि परीक्षा में सफल होने के बाद भी उन्हें अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया। बिना उनकी बात सुने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया, जिससे चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट खड़ा हो गया।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से परीक्षा में कथित बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को फैसले का आधार बताया गया था।
1,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर मंडरा रहा था खतरा
JSSC-CGL परीक्षा का रिजल्ट जारी होने के बाद कुल 1,932 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था। इनमें कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल चुका था और वे अलग-अलग सरकारी विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
लेकिन 18 अगस्त को सरकार की ओर से परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने की अधिसूचना जारी होने के बाद इन अभ्यर्थियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया था। अब हाईकोर्ट के फैसले से चयनित अभ्यर्थियों को राहत मिली है। अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों की सेवा को बिना किसी रुकावट के जारी मानने और रद्दीकरण की अधिसूचना के कारण सेवा संबंधी या आर्थिक लाभ से वंचित नहीं करने का निर्देश भी दिया है।
जांच जारी रहेगी, दोषियों पर हो सकती है कार्रवाई
हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले को खारिज करने के साथ यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच जारी रहेगी। जांच में जिन अभ्यर्थियों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकेगी।
अदालत का मानना है कि कुछ अभ्यर्थियों पर गड़बड़ी में शामिल होने का संदेह होने मात्र से पूरी परीक्षा और सभी चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द करना उचित नहीं है। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर व्यक्तिगत रूप से कार्रवाई की जा सकती है।

