झारखंड सरकार मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य की करीब 51 लाख लाभार्थी महिलाओं को हर महीने ₹2500 की सम्मान राशि के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार अब प्रत्येक महीने एक तय तारीख पर राज्य मुख्यालय से सिंगल क्लिक के जरिए सभी पात्र महिलाओं के बैंक खातों में सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से राशि ट्रांसफर करेगी।

महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग इस नई प्रणाली को अंतिम रूप देने में जुटा है। माना जा रहा है कि यह व्यवस्था अक्टूबर 2026 से पूरे राज्य में लागू हो सकती है।

‘मंईयां सम्मान दिवस’ पर होगा भुगतान

नई व्यवस्था के तहत सरकार हर महीने ‘मंईयां सम्मान दिवस’ मनाएगी। इस अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में एक साथ सभी लाभार्थियों के खातों में ₹2500 की राशि ट्रांसफर की जाएगी। इससे भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और सभी महिलाओं को एक ही दिन राशि मिलने लगेगी।

अब जिला नहीं, सीधे मुख्यालय से भेजी जाएगी राशि

अब तक योजना की राशि पहले जिला स्तर पर भेजी जाती थी, जिसके बाद लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर होती थी। इस प्रक्रिया में कई बार देरी होती थी। नई व्यवस्था में राशि सीधे राज्य मुख्यालय से डीबीटी के जरिए लाभार्थियों के खातों में भेजी जाएगी। विभाग का दावा है कि राशि जारी होने के 4 से 5 घंटे के भीतर महिलाओं के बैंक खातों में पहुंच जाएगी।

लंबित किस्तों का भुगतान भी जारी

सरकार ने कई जिलों में रुकी हुई किस्तों का भुगतान भी तेज कर दिया है। रांची, सिमडेगा, पलामू और पूर्वी सिंहभूम समेत कई जिलों में अप्रैल से जून तक की लंबित तीन महीने की ₹7,500 की राशि लाभार्थियों के खातों में भेजी जा चुकी है। वहीं, जिन महिलाओं की दो महीने की किस्त लंबित थी, उन्हें ₹5,000 एकमुश्त डीबीटी के माध्यम से दिए जा रहे हैं।

इन शर्तों का रखें ध्यान

योजना का लाभ निर्बाध रूप से मिलता रहे, इसके लिए लाभार्थियों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा।

बैंक खाता आधार से लिंक और DBT सक्षम होना चाहिए।

बैंक खाता सक्रिय होना जरूरी है। लंबे समय तक लेनदेन नहीं होने पर भुगतान प्रभावित हो सकता है।

बैंक विलय के बाद IFSC कोड या खाते की जानकारी बदल गई हो तो उसे अपडेट कराना आवश्यक है।

सरकार पात्र लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन भी करा रही है। गलत जानकारी मिलने पर योजना का लाभ रोका जा सकता है।