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झारखंड में पेट्रोल-डीजल संकट से हाहाकार, कई शहरों में पंप ड्राई; प्रशासन ने कहा- घबराएं नहीं

झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद, चाईबासा समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल-डीजल की भारी किल्लत देखने को मिल रही है। कई पेट्रोल पंपों पर “नो स्टॉक” के बोर्ड लग गए हैं, जबकि जहां ईंधन उपलब्ध है वहां लंबी कतारें लगी हुई हैं। अचानक बढ़ी मांग और सप्लाई चेन में आई रुकावट के कारण स्थिति गंभीर हो गई है। हालांकि जिला प्रशासन और तेल कंपनियों ने साफ किया है कि राज्य में ईंधन का कोई स्थायी संकट नहीं है और जल्द ही आपूर्ति सामान्य कर दी जाएगी।

जानकारी के मुताबिक HPCL और BPCL की सप्लाई चेन प्रभावित होने से कई जिलों में टैंकरों की नियमित आपूर्ति बाधित हो गई। इसका दबाव इंडियन ऑयल (IOCL) के पंपों पर बढ़ा, जहां लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। इसी बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों ने लोगों में घबराहट पैदा कर दी। लोग वाहनों के टैंक फुल कराने के साथ गैलन और डब्बों में भी तेल जमा करने लगे, जिससे कई पंपों का स्टॉक तेजी से खत्म हो गया।

स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई जिलों में सीमित मात्रा में ईंधन देने का फैसला लिया है। चाईबासा समेत कई इलाकों में दोपहिया वाहनों को 100 से 200 रुपये तक और चारपहिया वाहनों को 500 रुपये तक का ही तेल दिया जा रहा है। वहीं अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था भी की गई है। बोकारो और खूंटी डिपो से अतिरिक्त ईंधन टैंकर भेजे गए हैं ताकि जल्द आपूर्ति सामान्य हो सके।

रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री, जमशेदपुर के उपायुक्त राजीव रंजन और धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने तेल कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा ईंधन की खरीदारी न करें।

ईंधन संकट का असर आम जनजीवन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। लोगों को दफ्तर और स्कूल आने-जाने में परेशानी हो रही है। दूध सप्लाई, डिलीवरी सेवा और छोटे कारोबार प्रभावित हुए हैं। कई जगह फैक्ट्रियों में डीजल की कमी के कारण मशीनें और जनरेटर भी प्रभावित हुए हैं।

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