झारखंड पुलिस सिपाही भर्ती-2015 में चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरण पूरे करने के बावजूद नियुक्ति से वंचित रह गये अभ्यर्थियों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शुक्रवार को न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज और प्रमाणपत्रों का सत्यापन पूरा कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया। इस आदेश से करीब 250 पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का लाभ मिलने का रास्ता साफ हुआ है।
इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा, राजीव नंदा, शोएब आलम, सद्दाम फिरदौस, AOR F.I. Choudhury, अलिनेंद्र पांडेय और वात्सल्य विजया समेत अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा। अधिवक्ता एफआइ चौधरी (Adv. F.I. Choudhury) ने बताया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 65 अभ्यर्थियों की ओर से पैरवी की। उनके अनुसार, करीब 10 वर्षों से नियुक्ति के लिए कानूनी लड़ाई चल रही थी और हाई कोर्ट में बार-बार निराशा के बाद पिछले करीब तीन वर्षों से सुप्रीम कोर्ट में मामले की पैरवी की गयी।
7,272 पदों पर शुरू हुई थी भर्ती
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने वर्ष 2015 में विज्ञापन संख्या 04/2015 के तहत झारखंड पुलिस में 7,272 सिपाही पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू की थी। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी 2,380 पद रिक्त रह गये थे। इनमें 1,168 महिला और 1,212 अन्य श्रेणी के पद शामिल थे।
अभ्यर्थियों का कहना था कि उन्होंने चयन प्रक्रिया के निर्धारित विभिन्न चरणों को पूरा करने के साथ दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली थी। इसके बावजूद दूसरी मेरिट सूची जारी नहीं की गयी। इस कारण चयन प्रक्रिया में पात्र कई अभ्यर्थी नियुक्ति से वंचित रह गये।
छह याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई
नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में छह अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की थीं। इनमें जितेंद्र कुमार शर्मा व अन्य की एसएलपी संख्या 1359/2023, महताब खान व अन्य की 3950/2023, विष्णु कांत पांडेय व अन्य की 3964/2023, प्रकाश कुमार पांडेय व अन्य की 16380/2023, मिथिलेश कुमार महतो व अन्य की 16379/2023 और विशाल कुमार व अन्य की 16946/2023 शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की।
उम्र में विशेष छूट देकर होगी नियुक्ति
अधिवक्ता एफआइ चौधरी के मुताबिक, उनके 65 मुवक्किलों को नियुक्ति के लिए उम्र सीमा आदि में विशेष छूट का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अब अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता खुला है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ चयन प्रक्रिया में पात्र करीब 250 अभ्यर्थियों को मिलने की संभावना है।
रांची में हुई शारीरिक परीक्षा का परिणाम किया गया निरस्त
अधिवक्ता एफआइ चौधरी के अनुसार, राज्य सरकार की ओर से रांची में हाल ही में संबंधित अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक परीक्षा आयोजित की गयी थी। परीक्षा में अभ्यर्थी सफल नहीं हुए। उनका कहना है कि यह परीक्षा सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेश के अनुरूप नहीं थी।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय करोल ने इस शारीरिक परीक्षा के परिणाम को निरस्त कर दिया। इसके बाद अदालत ने पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेज और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर चार सप्ताह के भीतर नियुक्ति की कार्यवाही पूरी करने का निर्देश दिया।
10 साल बाद नियुक्ति की उम्मीद
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है। अब पात्र अभ्यर्थियों के दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। करीब 250 अभ्यर्थियों को इस आदेश से लाभ मिलने की संभावना है।

