झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच दो सीटों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे राज्य की राजनीति गरमा गई है।
मई-जून 2026 में खाली होने वाली इन दो सीटों को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी दावेदारी मजबूती से रख रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि गठबंधन में उसकी संख्या और योगदान को देखते हुए उसे एक सीट मिलनी चाहिए। पार्टी नेताओं का तर्क है कि पिछले चुनावों में उन्होंने सहयोगी दल को प्राथमिकता दी थी, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग हैं।
दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि राज्य में उसकी स्थिति मजबूत है और वह इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहती है।
इन सीटों में से एक सीट पूर्व नेता शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी, जबकि दूसरी सीट का कार्यकाल भाजपा नेता दीपक प्रकाश के जून 2026 में समाप्त होने वाला है।
अगर विधानसभा के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 81 सदस्यीय सदन में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों सीटें जीतने के लिए पर्याप्त हैं। एक सीट के लिए लगभग 28 वोटों की जरूरत होती है।
हालांकि, यदि गठबंधन के भीतर सहमति नहीं बनती है, तो क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में विपक्ष को फायदा मिल सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे को सुलझाने के लिए जल्द ही शीर्ष स्तर पर बातचीत हो सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेतृत्व के बीच संवाद से समाधान निकलने की उम्मीद जताई जा रही है।
फिलहाल राज्यसभा की इन सीटों को लेकर सियासी माहौल गर्म है और आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।