Site icon Jharkhand LIVE

झारखंड की नदियों को पुनर्जीवित करेगा वन विभाग, उद्गम स्थलों के संरक्षण के लिए शुरू होगा विशेष अभियान

झारखंड सरकार का वन विभाग राज्य की प्रमुख नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए विशेष अभियान शुरू करने जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य नदियों के जल स्रोतों को संरक्षित करना, पर्यावरण संतुलन को मजबूत करना और जल संकट की चुनौतियों से निपटना है।

वन विभाग की योजना के तहत नदियों के उद्गम स्थलों का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए जल संरक्षण, पौधारोपण, मिट्टी के कटाव की रोकथाम और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। साथ ही इन क्षेत्रों को इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की भी तैयारी है।

अभियान के तहत दामोदर, स्वर्णरेखा, उत्तरी कोयल, दक्षिणी कोयल और बराकर जैसी महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम स्थलों पर विशेष कार्य किए जाएंगे। इन नदियों का उद्गम झारखंड के विभिन्न पठारी क्षेत्रों से होता है और राज्य की जल व्यवस्था में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

योजना के अंतर्गत छोटे-छोटे चेक डैम बनाए जाएंगे, जिससे वर्षा जल का संरक्षण हो सके और भूजल स्तर में सुधार आए। इसके अलावा उद्गम स्थलों और नदी मार्गों से अतिक्रमण हटाने, सफाई अभियान चलाने तथा प्रदूषण नियंत्रण के उपाय भी किए जाएंगे।

वन विभाग स्थानीय ग्रामीणों और वन संरक्षण समितियों को भी इस अभियान से जोड़ेगा। अधिकारियों का मानना है कि जनभागीदारी से जल स्रोतों का संरक्षण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों के उद्गम स्थलों के संरक्षण से जल उपलब्धता बढ़ेगी, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा और आने वाले वर्षों में जल संकट की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी।

Exit mobile version