झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 2003 की वोटर लिस्ट से अनमैप्ड मतदाताओं की मैपिंग का काम लोगों और बीएलओ दोनों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। राज्य में 70 लाख से अधिक अनमैप्ड वोटरों की पहचान और मैपिंग की प्रक्रिया जारी है, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण यह काम प्रभावित हो रहा है। ऑनलाइन सिस्टम में सीमित जानकारी दिखने और सही मतदान केंद्र नहीं मिलने से मतदाता लगातार भटक रहे हैं।
निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार मैपिंग के लिए मतदाता या उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में होना जरूरी है। साथ ही सही मतदान केंद्र की जानकारी भी अनिवार्य है। पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होने के कारण ग्रामीण और बुजुर्ग मतदाताओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत निर्वाचन आयोग की इस प्रक्रिया में बीएलओ भी तकनीकी समस्याओं से जूझ रहे हैं। बूथ नंबर 181 के बीएलओ राकेश मुंडा के अनुसार मोबाइल पर सर्च करने पर केवल दो पेज ही खुल रहे हैं, जिसमें करीब 100 वोटरों के नाम दिखते हैं। पूरी 2003 वोटर लिस्ट उपलब्ध नहीं होने से सही जानकारी खोजने में काफी समय लग रहा है।
रांची के कई मतदाता पुराने मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन वहां उन्हें बताया जा रहा है कि उनका केंद्र बदल चुका है। ऐसे में लोग एक केंद्र से दूसरे केंद्र का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। हरमू निवासी कोलेश्वर महतो पिछले दो दिनों से सही मतदान केंद्र की तलाश में अलग-अलग बूथों का दौरा कर रहे हैं।
मतदाताओं ने मांग की है कि चुनाव आयोग अनमैप्ड सूची के साथ उन लोगों की सूची भी जारी करे जिनकी मैपिंग पूरी हो चुकी है। साथ ही 2003 की वोटर लिस्ट की हार्ड कॉपी भी मतदान केंद्रों पर उपलब्ध कराई जाए ताकि लोगों को राहत मिल सके।
इस मामले पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी रवि कुमार ने कहा कि जिन मतदाताओं की मैपिंग हो जाएगी, उन्हें किसी अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत नहीं पड़ेगी। वहीं जिनकी मैपिंग नहीं हो पाएगी, उन्हें नोटिस भेजकर दस्तावेजों की जांच की जाएगी। उन्होंने बताया कि सीईओ झारखंड की वेबसाइट पर जिला, विधानसभा और मतदान केंद्र के आधार पर अनमैप्ड सूची देखी जा सकती है। साथ ही विशेष कैंप खत्म होने के बाद बीएलओ घर-घर जाकर भी मैपिंग का काम करेंगे।

