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झारखंड में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा, खतियान-वंशावली में छेड़छाड़ का आरोप; CEO ने जारी किया अलर्ट

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान दस्तावेजों में कथित हेरफेर का मामला सामने आया है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के. रवि कुमार ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों और उपायुक्तों को सतर्क करते हुए संदिग्ध दस्तावेजों और पारिवारिक संबंधों की गहन जांच के निर्देश दिए हैं।

खतियान और वंशावली में छेड़छाड़ का आरोप

जांच और भौतिक सत्यापन के दौरान पुराने खतियान और वंशावली में कथित तौर पर छेड़छाड़ कर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के प्रयास सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में लोगों के नाम उनके वास्तविक परिवार के बजाय दूसरे परिवारों के सदस्यों से जोड़कर मैप करने की कोशिश भी पाई गई है।

भाई-बहनों की उम्र में सामने आया असामान्य अंतर

SIR के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जहां कथित तौर पर भाई-बहनों की जन्मतिथि में नौ महीने से भी कम का अंतर दर्ज है। निर्वाचन अधिकारियों ने इसे दस्तावेजों और पारिवारिक संबंधों के सत्यापन के दौरान सामने आने वाली महत्वपूर्ण विसंगति माना है।

पाकुड़, साहिबगंज, जामताड़ा और धनबाद समेत कुछ जिलों में ऐसे मामलों की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पाकुड़ और साहिबगंज से पांच दिन में रिपोर्ट तलब

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने पाकुड़ और साहिबगंज के जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को पत्र भेजकर संदिग्ध मामलों की गहन जांच करने और पांच दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

निर्देश में दस्तावेजों के साथ-साथ संबंधित व्यक्तियों के पारिवारिक संबंध और अन्य दावों का भी भौतिक सत्यापन करने पर जोर दिया गया है।

गलत दस्तावेज देने वालों पर होगी कार्रवाई

निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए गलत दस्तावेज या गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

माता-पिता और बच्चों के दावों की होगी एक साथ जांच

आयोग ने अधिकारियों को माता-पिता और बच्चों से जुड़े दावों की सुनवाई एक साथ करने का निर्देश दिया है। इससे उम्र, पारिवारिक संबंध और दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का आपस में मिलान किया जा सकेगा।

43 लाख से अधिक नाम हटाए जाने का दावा

SIR के दौरान झारखंड की मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित और अन्य संदिग्ध प्रविष्टियों को हटाने की प्रक्रिया भी चल रही है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अब तक 43 लाख से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं।

निर्वाचन विभाग का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहें और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।

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