झारखंड के ग्रामीण विकास विभाग में हुए ‘कमिशन घोटाले’ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कार्रवाई तेज कर दी है। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जारी जांच के बीच, ईडी ने अब विभाग के करीब एक दर्जन इंजीनियरों को समन जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।
इनमें कार्यपालक अभियंता (EE), सहायक अभियंता (AE) और कनीय अभियंता (JE) स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
कमीशन का ‘सेट’ फॉर्मूला: 3.2% का गणित
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक, ग्रामीण विकास विभाग में विकास योजनाओं के टेंडर आवंटन के लिए कमीशनखोरी का एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय था। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि टेंडर की कुल राशि का लगभग 3.2 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के रूप में वसूला जाता था।
टेंडर आवंटन में अवैध वसूली का बंटवारा कुछ इस तरह था:
1.5% हिस्सा: सीधे तत्कालीन विभागीय मंत्री को जाता था।
शेष हिस्सा: इंजीनियरों और अन्य अधिकारियों के बीच ऊपर से नीचे तक बांटा जाता था।
कई बड़े अधिकारी जांच के घेरे में
जांच के दायरे में अब
वरिष्ठ इंजीनियर,
विभागीय अधिकारी,
और कुछ प्रभावशाली बिचौलियों
के नाम सामने आए हैं। ED आने वाले दिनों में और अधिकारियों को समन जारी कर सकती है।
टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर के आरोप
सूत्रों के अनुसार, टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई जाती थीं कि चुनिंदा ठेकेदारों को ही लाभ मिले,
काम का आकलन और भुगतान प्रक्रिया में भी कथित तौर पर हेरफेर किया जाता था,
कमीशन की राशि नकद और बेनामी माध्यमों से इकट्ठा कर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाई जाती थी।
नौकर के घर से मिले थे 32 करोड़, अब इंजीनियरों की बारी
इस घोटाले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 मई 2024 को तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम के पीएस संजीव लाल के घरेलू नौकर जहांगीर के फ्लैट से ईडी ने 32.20 करोड़ रुपये नगद बरामद किए थे।
इसके अलावा अन्य करीबियों के ठिकानों से भी करोड़ों की नगदी और दस्तावेज जब्त किए गए थे। ईडी के अनुसार, कमीशन की इस राशि को व्यवस्थित तरीके से ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी संजीव लाल की थी।
22 आरोपियों पर चार्जशीट, मंत्री समेत कई सलाखों के पीछे
ईडी अब तक इस मामले में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम, उनके आप्त सचिव संजीव लाल, मुख्य अभियंता वीरेंद्र राम और उनके रिश्तेदारों सहित 22 लोगों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। वर्तमान में मंत्री और उनके करीबी जेल में हैं।
जांच एजेंसी अब उन इंजीनियरों की भूमिका की पड़ताल कर रही है जो इस कमीशन चेन के अहम हिस्सा थे और ठेकेदारों से सीधे संपर्क में रहते थे। ईडी द्वारा समन जारी किए जाने के बाद ग्रामीण विकास विभाग में हड़कंप मच गया है।