झारखंड में हाल ही में सामने आए करोड़ों रुपये के ट्रेजरी घोटाले और अवैध वेतन निकासी मामलों के बाद राज्य सरकार ने वित्तीय सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने अब वित्त विभाग के IFMS और Kuber सिस्टम को कार्मिक विभाग के HRMS पोर्टल के साथ मर्ज करने का फैसला लिया है।
सरकार का मानना है कि इस डिजिटल एकीकरण से भविष्य में वेतन घोटाले और फर्जी भुगतान जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
कैसे हुआ घोटाला?
वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों का सर्विस रिकॉर्ड HRMS पोर्टल पर मौजूद रहता है, जबकि वेतन भुगतान वित्त विभाग के IFMS/Kuber सिस्टम से होता है। दोनों सिस्टम अलग-अलग होने के कारण कई बार डेटा अपडेट समय पर नहीं हो पाता था।
जांच में सामने आया कि कुछ मामलों में कर्मचारी रिटायर होने या सेवा से हटने के बाद भी उनके नाम पर महीनों तक वेतन निकाला जाता रहा। इतना ही नहीं, कुछ कर्मियों ने कुबेर पोर्टल पर बेसिक सैलरी के आंकड़ों में छेड़छाड़ कर करोड़ों रुपये की अवैध निकासी कर ली।
अब क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी कर्मचारी के रिटायरमेंट, ट्रांसफर या सेवा स्थिति में बदलाव होते ही उसकी जानकारी सभी विभागों में तुरंत अपडेट हो जाएगी। इससे फर्जी भुगतान की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
संविदा कर्मियों पर रोक
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि अब संविदा या मानदेय पर नियुक्त कंप्यूटर ऑपरेटरों को वित्तीय कार्यों और बिल प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी।
तीन साल से जमे कर्मियों का तबादला
सरकार ने तीन साल से अधिक समय से एक ही स्थान पर कार्यरत लेखा सहायकों और विपत्र लिपिकों के अनिवार्य तबादले का भी फैसला लिया है। सभी विभागों को इसकी रिपोर्ट 30 मई 2026 तक सौंपने को कहा गया है।
कर्मचारियों का फिर होगा सत्यापन
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब सभी सरकारी कर्मचारियों के डेटा का दोबारा सत्यापन किया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों से शपथ पत्र भी लिया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
21 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी
जानकारी के मुताबिक हजारीबाग और बोकारो समेत कई जिलों में अब तक करीब 21 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध निकासी का मामला सामने आ चुका है। सरकार का कहना है कि नई डिजिटल व्यवस्था से ऐसी घटनाओं को जड़ से खत्म करने में मदद मिलेगी।

