झारखंड में वाहन खरीद और रजिस्ट्रेशन को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। अब दूसरे राज्यों में रहने वाले लोग झारखंड में वाहन नहीं खरीद सकेंगे, क्योंकि उनके नाम पर यहां रजिस्ट्रेशन नहीं होगा। परिवहन विभाग ने 1 अप्रैल से इस नियम को सख्ती से लागू कर दिया है।
नए नियम के अनुसार, वाहन रजिस्ट्रेशन के समय खरीदार को झारखंड में निवास का प्रमाण देना अनिवार्य होगा। इसके लिए रेंट एग्रीमेंट या अन्य स्थानीय दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक यह नियम पहले से लागू था, लेकिन इसका सख्ती से पालन नहीं कराया जा रहा था। अब इसे पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है।
दरअसल, झारखंड में रोड टैक्स बिहार की तुलना में काफी कम है। यहां सात लाख रुपये तक की गाड़ियों पर 7 प्रतिशत और उससे अधिक कीमत पर 9 प्रतिशत टैक्स लगता है, जबकि बिहार में यह करीब 13 प्रतिशत है। इसी कारण दोनों राज्यों के बीच वाहन कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है।
कम टैक्स के चलते बिहार के सीमावर्ती जिलों के लोग बड़ी संख्या में झारखंड से वाहन खरीदते थे। साहिबगंज, गोड्डा, दुमका और देवघर के शोरूम में लगभग 25 प्रतिशत ग्राहक बिहार से आते थे। लेकिन अब नए नियम के बाद इस पर रोक लग जाएगी।
साहिबगंज के जिला परिवहन पदाधिकारी मिथिलेश चौधरी के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति झारखंड में वाहन खरीदता है तो उसका यहां रहना जरूरी है, इसलिए उसे स्थानीय पता देना होगा। उन्होंने बताया कि यह व्यवस्था पहले से थी, लेकिन अब इसे सख्ती से लागू किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से जहां बाहरी खरीदारों पर रोक लगेगी, वहीं राज्य सरकार को राजस्व नुकसान भी हो सकता• है।

