झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाने वाला एक मामला सामने आया है। वर्ष 2020 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले चुके एक डॉक्टर का नाम वर्ष 2026 की तबादला और प्रोन्नति सूची में शामिल होने से प्रशासनिक स्तर पर हड़कंप मच गया है। इस घटना के बाद विभाग के रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, चाईबासा (सदर) से 29 जुलाई 2020 को जारी आदेश में डॉ. अरुण कुमार को 1 अगस्त 2010 से प्रभावी रूप से वीआरएस देने की बात कही गई थी। इसके बाद उनके पेंशन से जुड़े कागजात भी संबंधित विभाग को भेज दिए गए थे। इससे साफ है कि वे काफी पहले ही सरकारी सेवा छोड़ चुके थे।
लेकिन हैरानी की बात यह है कि 24 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग की तबादला और प्रोन्नति सूची में उनका नाम फिर से शामिल कर दिया गया। इस सूची में उन्हें सदर चाईबासा के चिकित्सा पदाधिकारी से बढ़ाकर क्षेत्रीय उपनिदेशक, छोटानागपुर प्रमंडल, रांची के पद पर दिखाया गया है। इसी वजह से मामला चर्चा में आ गया है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो डॉक्टर सालों पहले सेवा से बाहर हो चुके हैं, उनका नाम नई सूची में कैसे आ गया। क्या यह केवल रिकॉर्ड की गलती है या विभाग की बड़ी लापरवाही है? या फिर दस्तावेजों में सेवा जारी दिखाकर नियमों को नजरअंदाज किया गया है?
मामले को और गंभीर इसलिए माना जा रहा है क्योंकि जानकारी के मुताबिक डॉ. अरुण कुमार इस समय चाईबासा में निजी अस्पताल भी चला रहे हैं। आम तौर पर वीआरएस के बाद निजी काम करने की अनुमति होती है, लेकिन सरकारी पद पर उनका नाम फिर से आना नियमों पर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल विभाग की ओर से कोई साफ जवाब नहीं आया है। इस पूरे मामले की जांच की मांग उठ रही है और लोग जानना चाहते हैं कि यह सिर्फ गलती है या किसी बड़ी गड़बड़ी का संकेत।
