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ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री का आरोप – झारखंड सरकार छात्रों का भविष्य कर रही है बर्बाद

ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री का आरोप – झारखंड सरकार छात्रों का भविष्य कर रही है बर्बाद

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के द्वारा राजभवन के समक्ष राज्य में लचर शैक्षणिक व्यवस्था के विरुद्ध एक दिवसीय छात्र हुंकार धरना आयोजित किया गया। एबीवीपी के इस छात्र हुंकार धरना में झारखंड के तमाम जिलों से भारी संख्या में छात्र छात्राएं सम्मिलित हुए। एबीवीपी के बैनर तले इस आंदोलन में छात्र अपने हक और अधिकार के लिए, राज्य में लचर शैक्षणिक व्यवस्था के विरुद्ध हुंकार भरा , साथ ही साथ सभी ने जमकर नारेबाजी भी किया।

 

इस आंदोलन में अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल भी मौजूद थे। छात्र हुंकार धरना को संबोधित करते अभाविप के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल ने कहा कि आज का आंदोलन छात्रों के रोजगार के लिए है, उनके बेहतर भविष्य के लिए है, ताकि आने वाली पीढ़ी हमसे यह सवाल ना करें कि जब झारखण्ड में लूट मची थी, तो हम कहां थे।

उन्होंने कहा झारखण्ड के विभिन्न विश्वविद्यालयों में स्थायी कुलपति लम्बे समय से नहीं है। कई विश्वविद्यालय है जहां स्थायी कुलसचिव नहीं है। बहुत से डिग्री कॉलेजों में स्थाई प्राचार्य नहीं है, एक प्राचार्य को कई महाविद्यालय का जिम्मा दे दिया जाता है। आखिर शिक्षा प्राप्त कर एवं शिक्षा से वंचित होकर आज बेरोजगारी के कारण युवा इधर उधर भटक रहे हैं। झारखण्ड सरकार ने वादे तो बहुत किए थे लेकिन वादे को पूरा करने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति करनें का काम किया है। सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में भ्रष्टाचार कर छात्रों का भविष्य अधर में लटकाने का भी प्रयास पूरे धड़ल्ले से इस झारखंड में किया जा रहा है,

पूरे झारखंड प्रदेश में शिक्षण व्यवस्था बदहाली की कगार पर है, राज भवन एवं साथ ही राज्य सरकार से भी यह पूछना चाहता हूं कि ऐसी क्या मजबूरी है कि कुलपति नियुक्तियों को बीच में ही रोक दी गई, राजभवन को इसे लेकर एक श्वेत पत्र जारी करके आम छात्रों को स्पष्टीकरण देनी चाहिए कि कुलपति नियुक्ति प्रक्रिया को बीच में ही क्यों रोक दी, कुलपतियों की नियुक्ति की विज्ञापन निकलने के बाद भी 9 महीने से अभी तक कुलपतियों की नियुक्ति नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय हाशिए पर चला गया है, साथ ही कुलपतियों की नियुक्तियां की विज्ञापन को निरस्त करना विश्वविद्यालय व छात्रों का सर्वांगीण विकास न होने में बड़ा रुकावट नजर आ रहा है, आखिर ऐसा क्या कारण है की नियुक्तियों को बीच में रद्द किया गया, आपको बता दे कि 2007 के बाद किसी भी प्रकार की स्थाई नियुक्ति प्राध्यापकों की नहीं हुई है साथ ही सभी महाविधालयों में 90% अस्थाई प्रभारी प्राचार्य के सहारे महाविद्यालय चल रही हो, वहां के शिक्षण व्यवस्था कैसी होगी आप परिकल्पना कर सकते हैं, रांची विश्वविद्यालय में 1032 पोस्ट अध्यापकों की स्वीकृत की हुई है, अभी तक 686 पोस्ट रिक्त पड़ी हुई है, आप समझ सकते हैं की बार-बार नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द किया जाना कहीं ना कहीं पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़ा करती है, रांची विश्वविद्यालय के अंतर्गत 18 अंगीभूत महाविद्यालय है जिसमे तीन स्थाई प्राचार्य ही मौजूद हैं, विगत 8 वर्षों के पश्चात यह सरकार झारखंड संयुक्त योग्यता धारी परीक्षा का आयोजन करती है और वह भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ जाती है, यह भी झारखंड के इतिहास में एक काला अध्याय के रूप में हम सभी देखते हैं, यहां की सरकार माल प्रैक्टिस में एवं उनके एजेंसियां एवं उनके दलाल खुद संलिप्त नजर आती है, यहां की सरकार सिर्फ लूट, खसोट ,भ्रष्टाचार में लिप्त है यहां के युवाओं को ठगने का कार्य यहां की सरकार कर रही है , किसी भी प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए नियम ,नीति , नियत साफ रखकर के हम आगे बढ़ सकते हैं जो कि यहां की सरकार में बिल्कुल नहीं दिख रही है.

 

पूरे 24 जिला से आए हुए धरना प्रदर्शन में हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं सम्मिलित रहे, जिसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवल्क्य शुक्ल, क्षेत्रीय संगठन मंत्री निखिल रंजन, राष्ट्रीय कार्य समिति सदस्य रोमा तिर्की, जनजातिया कार्य प्रमुख प्रमोद रावत कार्यकारिणी सदस्य रमेश उरांव, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विशाल सिंह,प्रदेश संगठन मंत्री राजीव रंजन, राष्ट्रीय प्रादेशिक विवि कार्य सह प्रमुख विनीत पांडे, दुर्गेश यादव,सह मंत्री शुभम राय,गौतम महतो, डब्लू भगत, नवलेश सिंह, रितेश यादव,विवेक पाठक, शिवेंद्र सौरभ, सौरव विद्यानंद, निवास मंडल, अभिनव जीत, किरण ऋतुराज, अमन, सिद्धांत, शारदा, संजना, साक्षी, कार्तिक गुप्ता, प्रणव गुप्ता, आनंद एवं हजारों की संख्या में छात्र हुंकार महा धरना में 24 जिला से आए हुए छात्र-छात्राएं एवं कार्यकर्ता गण उपस्थित रहे।

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