झारखंड : लॉकडाउन के दौरान 449 लोगों ने किया आत्महत्या, हर 5 घंटे में एक सुसाइड की घटना

झारखंड : लॉकडाउन के दौरान 449 लोगों ने किया आत्महत्या, हर 5 घंटे में एक सुसाइड की घटना

झारखंड में पिछले तीन महीने में 449 लोगों ने आत्महत्या कर अपने जीवन को समाप्त कर दिया. राज्य सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के मुताबिक मार्च से जून 25 तक प्रतिदिन औसतन 5.5 लोगों ने खुदखुशी कर अपने जीवन का खत्म कर दिया.

सिर्फ जून महीने में खुदखुशी के 134 मामले पूरे राज्य में सामने आ चुके हैं. राजधानी रांची में 1 अप्रैल से 25 जून तक 55 लोग आत्महत्या कर चुके हैं. जबकि राज्य में कोरोना वायरस के कारण मात्र 12 लोगों ही मौत हुई है. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर लॉकडाउन के दौरान इतनी बड़ी संख्या में लोगों के खुदखुशी मामले क्यों बढ़ रहे हैं.

इन आत्महत्याओं को कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन से भी जोड़कर देखा जा रहा है. मनोचिकित्सकों का भी मानना है कि इन बढ़ती हुई आत्महत्याओं के पीछे की मुख्य वजहों में देश में लागू लॉकडाउन भी हैं.

हर 5 घंटे में एक आत्महत्या

झारखंड सरकार द्वारा जारी रिपोर्ट की माने तो राज्य में हर 4.50 घंटे में एक व्यक्ति खुदखुशी कर मौत के आगोश में जा रहा है. लॉकडाउन के कारण बड़ी संख्या में लोग अवसाद के शिकार हो रहे हैं. डिप्रेशन से जकड़े इन लोगों को न तो ठीक से उपचार मिल पा रहा है और न ही किसी मनोचिकित्सक से परामर्श.

जीने की उम्मीद खो रहे लोग

सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ साइकेट्री के डॉक्टर ने बताया कि लॉकडाउन लागू होने से लेकर अनलॉक 1.0 तक हमारे यहाँ 1,200 से ज्यादा लोग अवसाद की शिकायत लेकर पहुँचे. इस समयकाल में डिप्रेशन से परेशान 150 लोगों ने रोजाना कॉल के माध्यम से संपर्क किया. इनमें से तकरीबन 20 प्रतिशत लोग ऐसे थे जो अपने जीवन में सभी तरह की उम्मीद खो चुके थे और अपना जीवन समाप्त करने की इच्छा जाहिर कर रहे थे.

आर्थिक तंगी और बेरोजगारी से खौफज़दा लोग

लोगों के मन में सुस्त अर्थव्यवस्था, नौकरी खोने, बेरोजगारी के डर से असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है. जिससे वे इस प्रकार की विभत्स कदम उठाने से भी नहीं हिचक रहे हैं. सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ साइकेट्री के डॉक्टर संजय कुमार मंडल भी यह स्वीकारते है कि लॉकडाउन के दरम्यान उनके यहाँ अवसाद से ग्रसित मरीजों की आमद काफी बढ़ी है.

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आत्महत्या की प्रवत्ति के अन्य कारणों की ओर इशारा करते हुए डॉ. संजय कुमार मंडल बताते है कि घरेलू विवाद और परिवार में आपसी कलह के कारण लोगों में जरूरत से ज्यादा भावनाओं एवं जज़्बातों का संचार हो रहा है जिसकी वजह से लोगों के जहन में मरने के विचार आने लगते हैं. इसके साथ ही कई अन्य कारक भी है जिसपर गौर करना चाहिए. समय पर ऐसे मरीजों को उपचार और परामर्श के जरिये ठीक किया जा सकता हैं.   

Jharkhand LIVE Staff

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