1 साल के लिए काम करने झारखंड से अंडमान गए थे फुचा महली, 35 साल तक बंधुआ मजदूर बन कर गुजारे, बच्चों ने पहचाना तक नहीं

1 साल के लिए काम करने झारखंड से अंडमान गए थे फुचा महली, 35 साल तक बंधुआ मजदूर बन कर गुजारे, बच्चों ने पहचाना तक नहीं

70 की उम्र को पार कर चुके फुचा महली अब सही से खड़े भी नहीं हो पा रहे हैं। आवाज भी साफ नहीं निकल रही है। चलना दुभर हो गया है लेकिन उनके चेहरे पर एक गर्वीली मुस्कान है। मुस्कान इस बात की, कि उम्र के आखिरी पड़ाव में ही सही लेकिन उन्हें अपनी मिट्‌टी मयश्सर हो गई। कहते हैं बच्चे तो मुझे नहीं पहचान पाए, लेकिन पत्नी के पैर में काले दाग से मैं उसे पहचान लूंगा।

 झारखंड के गुमला जिले के विशुनपुर प्रखंड के फोबिया के रहने वाले फुचा महतो की पूरी जवानी बंधुआ बंधुआ मजदूर के रूप में बीत गई । आज से 35 साल पहले वे मात्र 1 साल काम करने के उद्देश्य से अंडमान गए थे। सरकार की पहल से दो दिन पहले ही उन्हें मुक्त कराकर झारखंड लाया गया है।

फुचा महली अपनी रुआंसी आवाज में कहते हैं कि तब वे जवान थे। शादी को अभी 5 साल ही बीते थे। वहां पैसा कमान गए थे ताकि परिवार को बेहतर सुविधा मुहैया करा सकें। अचानक कंपनी बंद हो गई। खाने को लाले तक पड़ गए।

लकड़ी फाड़कर और गाय धोकर किया गुजर-बसर

फुचा महली ने बताया घर का रास्ता तो पता था लेकिन किराए के लिए पैसा कहां से लाता। न जाने कितनों को गुहार लगाया लेकिन किसी ने मदद नहीं की। कई दिन और रातें भूखे गुजारनी पड़ी। लोगों के लकड़ी फाड़ता था तब वे खाना देते थे। खाने के लिए लोगों के घरों में नौकर बनकर उनकी गाय को खिलाता था।  तब किसी तरह दो टाइम का खाना मिल जाया करता था।

गुमला के लेबर कमिश्नर को आया था फोन

प्रवासी मजदूरों को मदद कर रही संस्था शुभ संदेश फाउंडेशन के डैनियल पुनराज ने बताया कि गुमला के लेबर कमिश्नर को इनकी जानकारी मिली थी। उन्होंने इसकी जानकारी स्टेट हेल्पलाइन को दी। इसके बाद श्रममंत्री सत्यानंद भोक्ता के निर्देश पर संस्था ने उन्हें झारखंड वापस लेकर आई।

Jharkhand LIVE Staff

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