30 लाख का इनामी दिनेश गोप को 16 सालों से खोज रही है पुलिस, लेकिन अब तक एक तस्वीर भी नहीं खोज पाई

30 लाख का इनामी दिनेश गोप को 16 सालों से खोज रही है पुलिस, लेकिन अब तक एक तस्वीर भी नहीं खोज पाई

झारखंड पुलिस के लिए प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) सिरदर्द बना हुआ है। पुलिस इस संगठन के सुप्रिमो दिनेश गोप की 16-17 सालों से तलाश कर रही है, लेकिन इन सालों में पुलिस उसे खोजना तो दूर उसकी एक तस्वीर भी खोज नहीं पाई है।

पीएलएफआई सुप्रिमो दिनेश गोप पर झारखंड पुलिस ने 25 लाख रूपया और केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने 5 लाख रूपया का इनाम रखा है। वह मूल रूप से खूँटी जिला के कर्रा थाना क्षेत्र के लापा मोरहाटोली ग्राम का रहने वाला है। उसके खिलाफ रांची, खूंटी सहित विभिन्न जिलों में दर्जनों केस दर्ज है। एनआईए की टीम टेरर फंडिंग मामले में उसकी और उसके कई रिश्तेदारों की दर्जनों संपत्तियों को जब्त कर कर चुकी है। साथ ही उसकी तलाश भी कर रही है।

पुलिस को लगातार दे रहा चुनौती

पीएलएफआई संगठन इन दिनों रांची पुलिस को खुली चुनौती दे रहा है। उससे जुड़े लोग खुलेआम संगठन और अपने सुप्रिमो दिनेश गोप के नाम पर रंगदारी की मांग रहे हैं। रंगदारी नहीं देने पर जान से मारने की धमकी और दशहत फैलाने के लिए फायरिंग जैसी वारदात को अंजाम दे रहे हैं। हाल में ही रांची में ऐसी कई घटना हुई, जिसमें पीएलएफआई संगठन का नाम सामने आया है।

एसएसपी ने कहा- ढूंढ़कर मार गिराएंगे।

रांची के एसएसपी सुरेंद्र कुमार झा ने पत्रकारों से बात करते हुए कि पुलिस पीएलएफआई सुप्रिमो दिनेश गोप की तलाश कर रही है, वह जहां भी होगा उसको ढूंढ़कर मार गिराएंगे।

पीएलएफआई एरिया कमांडर तुलसी पाहन सहित पांच नक्सलियों की गिरफ्तारी के बाद मीडिया से बात करते रांची एसएसपी (18 नवंबर)

युवाओं को संगठन से जोड़कर देता है वसूली का छूट

पुलिस के मुताबिक इस संगठन में वैसे लोग शामिल होते हैं। जो बेरोजगार होते है या फिर पहले से ही अपराध की दुनिया में हैं। ऐसे लोगों को पीएलएफआई सुप्रिमो दिनेश गोप संगठन में जोड़ता है। फिर उन्हें हथियार और एक निश्चित राशि का भरोसा देकर एरिया का कमांडर बना देता है। इसके साथ ही उसे उस इलाके में लेवी वसूलने के लिए खुली छूट देता है और फिर यही लोग पीएलएफआई और दिनेश गोप के नाम पर रंगदारी वसूलते हैं।

दोनों पत्नियों बन चुकी हैं सरकारी गवाह

पीएलएफआई सुप्रिमो दिनेश गोप ने दो शादियां की हैं, दोनों ही पत्नी इस वक्त सलाखों के पीछे हैं। एनआईए ने इसी साल 31 जनवरी को दिनेश गोप की दोनों पत्नियां हीरा देवी व शकुंतला कुमारी को लेवी वलूलन के आरोप में गिरफ्तार किया था। दोनों ही पत्नी एनआईए कोर्ट में टेरर फंडिंग मामले में सरकारी गवाह बन चुकी हैं।

26 चक्र की सुरक्षा में रहता है दिनेश गोप

झारखंड पुलिस अब तक पीएलएफआई सुप्रिमो के कई करीबियों को गिरफ्तार कर चुकी है, लेकिन अब तक दिनेश गोप तक नहीं पहुंच पाई है। गिरफ्त में आए पीएलएफआई के कई नक्सलियों ने पुलिस पूछताछ में बचा चुके है कि पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप 26 चक्र की सुरक्षा दस्ते में रहता है, उसके पास पहुंचने के लिए 26 चक्र को भेदना पड़ता है, इसलिए वह अबतक पुलिस से बचता रहा है।

जब भी पुलिस उसके इर्द गिर्द पहुंचती है, तब तक उसे पुलिस के आने की जानकारी हो जाती है और वह मौके से निकल जाता है। जानकारी के मुताबिक वह अक्सर आर्मी ड्रेस में ही रहता है। अगर उसे कहीं जाना होता हो तो केवल उसकी पहली सुरक्षा में रह रहे लोगों को ही पता चल पाता है।

पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) का इतिहास

पीएलएफआई संगठन, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया माओवादी (सीपीआई-माओवादी) से निकला हुआ नक्सली संगठन है। पहले यह संगठन झारखंड लिबरेशन टाइगर (JLT) के नाम से जाना जाता था। इसमें नक्सली संगठन छोड़कर आए लोगों ही शामिल थे और ये लोग पुलिस की मदद किया करते थे, लेकिन धीरे-धीर ये संगठन अपने उद्देश्यों से भटकने लगा और फिर नाम बदकर पीपल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (PLFI) बन गया। यही नहीं ये नक्सलियों के समानांतर भी खड़ा हो गया और पुलिस को ही चुनौती देने लगा। रांची के ग्रामीण व शहरी इलाकों, गुमला, लोहरदगा, सिमडेगा, खूंटी, हजारीबाग, सिंहभूम, सहित राज्य के कई जिलों में इसने अपना मजबूत संगठन खड़ा कर लिया है। यह अब नक्सलियों की तरह हिंसक घटनाओं को अंजाम देने और लेवी वसूलने का काम किया करता है।

Jharkhand LIVE Staff

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