झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक विवाद के बीच आयोग के अध्यक्ष एल. खियांग्ते (L. Khiangte) ने अपने पद से स्वेच्छा से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव में नहीं, बल्कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
एल. खियांग्ते ने कहा कि सीआईडी (CID) की जांच शुरू होने के बाद उन्हें लगा कि यदि वह अध्यक्ष पद पर बने रहते हैं तो जांच प्रभावित करने या पद के दुरुपयोग के आरोप लग सकते हैं। इसलिए उन्होंने पद छोड़कर एक सामान्य नागरिक के रूप में जांच में सहयोग करने का निर्णय लिया।
ब्लैकलिस्टेड एजेंसी पर भी दी सफाई
उत्तर प्रदेश में ब्लैकलिस्ट की जा चुकी एजेंसी को परीक्षा का जिम्मा देने के आरोपों पर खियांग्ते ने कहा कि एजेंसी के चयन के समय उन्हें उसके ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी नहीं थी। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और वह जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।
9 भर्ती परीक्षाएं स्थगित
विवाद के बीच राजभवन द्वारा इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद JPSC ने संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा (Mains) सहित कुल 9 भर्ती परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है। इससे हजारों अभ्यर्थियों की तैयारी और परीक्षा कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
जांच में अब तक की कार्रवाई
सीआईडी की एसआईटी ने JPSC कार्यालय और एल. खियांग्ते के आधिकारिक आवास समेत कई स्थानों पर छापेमारी की।
मामले में अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
गिरफ्तार आरोपियों में JPSC की पूर्व डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन श्वेता गुप्ता और डेटा प्रोसेसिंग एजेंसी के कर्मचारी भी शामिल हैं।
क्या बोले एल. खियांग्ते?
इस्तीफा पूरी तरह स्वेच्छा से दिया।
किसी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव से इनकार।
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच के लिए पद छोड़ा।
जांच एजेंसियों को हर स्तर पर सहयोग करने की बात कही।

