कौन हैं 83 साल के फादर स्टेन स्वामी ? जिन्हें NIA ने माओवादी बताकर रांची से गिरफ्तार किया है

कौन हैं 83 साल के फादर स्टेन स्वामी ? जिन्हें NIA ने माओवादी बताकर रांची से गिरफ्तार किया है

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की टीम ने 8 अक्टूबर की रात में 83 साल के सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी को रांची के नामकुम से स्थिति उनके घर से गिरफ्तार किया है। एनआईए ने उनपर राजद्रोह की धारा और यूएपीए के तहत कार्रवाई की है। जिसका अब विरोध भी शुरू हो गया है। रांची सहित देश के कई हिस्सों में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एनआईए की इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाए हैं।

एनआईए ने फादर स्टेन स्वामी पर भाकपा माओवादियों के लिए काम करने का आरोप लगाया है। एनआईए ने अपनी चार्जशीट में कहा है कि फादर स्टेन स्वामी भाकपा माओवादियों के संपर्क में थे और उनके लिए प्रचार प्रसार किया करते थे। इसके साथ ही फंड जुटाने का भी काम करते थे।

हालांकि गिरफ्तारी से पहले फादर स्टेन स्वामी ने एक वीडियो जारी कर एनआईए पर फंसाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि एनआईए ने मेरे खिलाफ फर्जी सबूत इकट्ठा करके मेरा संबंध माओवादियों से दिखाया है। सरकार मुझे रास्ते से हटाने की कोशिश कर रही है।

हेमंत सोरेन ने कहा

इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि “गरिब, वंचितों और आदिवासियों की आवाज़ उठाने वाले 83 वर्षीय वृद्ध ‘स्टेन स्वामी’ को गिरफ्तार कर केंद्र की भाजपा सरकार क्या संदेश देना चाहती है? अपने विरोध की हर आवाज को दबाने की ये कैसी जिद्द?”

कौन हैं फादर स्टेन स्वामी ?

फादर स्टेन स्वामी मूल रूप से केरल के रहने वाले हैं। लेकिन पिछले पांच दशकों से वो झारखंड में है। उनकी पहचान सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है। केरल से बिहार यानी अबके झारखंड आने के बाद उन्होंने शुरुआती दिनों में पादरी का काम किया। इसके बाद वह पादरी का काम छोड़कर आदिवासी और विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने लगे। बतौर मानवाधिकार कार्यकर्ता उन्होंने झारखंड में रहकर विस्थापन, संसाधनों की कंपनियों द्वारा लूट, विचाराधीन कैदियों व पैसा कानून पर काम किया है। 

इसके साथ ही झारखंड के जेलों में बंद दस हजार से अधिक विचाराधीन कैदियों को लेकर सर्वे तैयार किया और फिर इसे लेकर कोर्ट में लड़ाई भी लड़ी। वे रांची के नामकुम क्षेत्र में आदिवासी बच्चों के लिए स्कूल और टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट चलाते हैं।

जब राज्य में बीजेपी की रघुवर सरकार थी, तब उनपर पत्थलगड़ी आंदोलन के मुद्दे पर तनाव भड़काने का आरोप लगा और खूंटी पुलिस ने उनके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया था, लेकिन इस बीच उनका नाम भीमा कोरेगांव में हिंसा भड़काने की साजिश में आ गया।

भीमा कोरेगांव हिंसा क्या है ?

एक जनवरी 2018 को महाराष्ट्र के पुणे के भीमा कोरेगांव में दलित और मराठा समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी। हिंसा की घटना के एक दिन पहले वहां यलगार परिषद की एक रैली भी हुई थी। आरोप है कि इसी रैली में हिंसा भड़काने की भूमिका तैयार की गयी थी। इस मामले की जांच एनआईए कर रही है। अबतक जांच के दौरान एनआईए ने प्रसिद्ध कवि वरवरा राव, सुरेंद्र गाडलिंग, सुधीर धावले, महेश राउत, शोमा सेन, रोना विल्सन, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, गोंजाल्विस, गौतम नवलखा, फादर स्टेन स्वामी  समेत 16 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

Jharkhand LIVE Staff

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