बेटे के IAS बनने के बाद भी माँ बेच रही चूड़ियाँ, बोली इन्हीं पैसों से पढ़ाकर बनाया कलेक्टर

बेटे के IAS बनने के बाद भी माँ बेच रही चूड़ियाँ, बोली इन्हीं पैसों से पढ़ाकर बनाया कलेक्टर

महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के वारसी तहसील स्थित महागांव में जन्मे रमेश घोलप वो शख्स हैं जो गरीबी की आँच से तपकर निकले और आज एक आईएएस अफसर हैं.

परिस्थितियाँ कितनी ही विकट क्यों न हो, एक दृढ़ संकल्प ही काफी है अपनी मंज़िल को हासिल कर लेने के लिए. इस पंक्ति को आठ साल पहले रमेश घोलप हकीकत में बदलने में कामयाब रहे.

रमेश घोलप ने बालावस्था में ही जीवन की विपरित धाराओं में बहना सीख लिया था. माँ घर चलाने के लिए गाँव में घूमघूमकर चूड़ियाँ बेचती थी. रमेश भी 10 साल की छोटी से आयु में ही माँ की मदद के लिए उनके साथ चूड़ियाँ बेचने के लिए निकल पड़ते.

चूड़ियाँ बेचकर कुछ पैसे तो इकट्ठा हो जाते थे लेकिन वे रूपये घर के राशन की जगह नशे की लत के शिकार पिता की शराब में खर्च होते थे.

दिन भर की मेहनत के बाद भी माँ और बेटे की पेट की आग बूझ नहीं पाती थी. इन कष्टदायक हालातों में भी रमेश के हौसले कभी परास्त नहीं हुए. उन्होंने इन परिस्थितियों से हतोत्साहित होने की बजाय इसे ही अपनी मजबूती बना ली. 

बोर्ड इम्तिहान से एक माह पूर्व पिता का निधन हो गया. रमेश ने अपनी भावनाओं को समेट कर परीक्षा के लिए लगन से मेहनत की और 88.50 पर्सेंट अंक प्राप्त किये.

रमेश घोलप उच्च शिक्षा के लिए पुणे रवाना तो हो गए परंतु आगे की राह भी उनके लिए कोई आसान नहीं थी. पढ़ाई के लिए रूपयों का इंतजाम करना उनके लिए दाँतों तले लोहा चबाने जैसे था.

माँ ने अपने प्रतिभावान बेटे की पढ़ाई के लिए जैसे तैसे किसी सरकारी योजना के अंतर्गत कर्ज लिये और 18 हजार रूपये का जुगाड़ किया. पुणे में रमेश भी आईएएस बनने का इरादा मन में बांध चुके थे. दिन में सड़कों पर पर्चे बाँटने, दीवारों पर पेंटिंग करने का काम कर पैसे जुटाते और रात के वक्त पढ़ाई किया करते थे.

प्रायः उन्हें परीक्षा में विफलता हाथ लगी. मगर वर्ष 2011 में उन्होंने पुनः लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी और 287वें स्थान के साथ सफल हुए. उन्होंने अपने कौशल का परिचय महाराष्ट्र के सेवा परीक्षा में भी दिखाया और पहला मुकाम हासिल किया.

वर्तमान में रमेश घोलप झारखंड के कोडरमा जिले में बतौर कलेक्टर पदस्थ हैं. उनकी कहानी जब तमाम मीडिया संस्थानों में छपने के बाद जन – जन तक पहुँचने लगी तो उन्होंने भी एक ट्विट कर लोगों को ऐसी जानकारी से अवगत कराया जिससे सभी दंग रह गये.

उन्होंने अपने ट्विट में कहा कि, “मुझे आईएएस बने 8 साल हो गये. माँ आज भी चूड़ियाँ बेचती है. कहती है, ‘यहीं चूड़ियाँ बेचकर मिले पैसों से तुझे पढ़ाकर कलेक्टर बनवाया है. जबतक हाथ चलेंगे चूड़ियाँ बेचती रहूंगी.’ विपरित हालात में जो साथ देते है उनको कभी नहीं भूलना चाहिए. एक आईएएस बेटे की माँ की ऐसी उदारते देख लोगों में उनके प्रति सम्मान काफी बढ़ गया. रमेश घोलप भी जिलाधिकारी के नाते यदाकदा लोगों की मदद में जुटे रहते हैं और माँ अपने उसी गाँव में सादगी के साथ जीवन का गुजर बसर कर रही हैं.

Jharkhand LIVE Staff

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