झारखंड दौरे पर पहुंचीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने एक बार फिर अपनी सादगी और जनता के प्रति आत्मीयता से लोगों का दिल जीत लिया। सरायकेला में राष्ट्रपति ने सुरक्षा प्रोटोकॉल को एक ओर रखते हुए सड़क पर उतरकर आम लोगों से मुलाकात की, जिससे पूरे क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल बन गया। यह दृश्य देखते ही देखते ऐतिहासिक बन गया और सरायकेला तथा जमशेदपुर के लोगों के लिए यादगार पल बन गया।
यह घटना झारखंड दौरे के दूसरे दिन सामने आई, जब राष्ट्रपति नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में शामिल होकर वापस लौट रही थीं। राष्ट्रपति की एक झलक पाने के लिए स्थानीय लोग घंटों पहले से बैरिकेडिंग के पीछे खड़े थे, बावजूद इसके कि सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
आकाशवाणी चौक पर उमड़ा जनसैलाब, ‘भारत माता की जय’ से गूंजा इलाका
जब राष्ट्रपति का काफिला सरायकेला के आकाशवाणी चौक के पास पहुंचा, तो वहां मौजूद जनसैलाब का उत्साह देखते ही बन रहा था। लोगों की आंखों में राष्ट्रपति से मिलने की उम्मीद और चेहरे पर अपार खुशी साफ झलक रही थी। इसी दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू स्वयं को रोक नहीं सकीं और अचानक अपना काफिला रुकवाया।
प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना राष्ट्रपति गाड़ी से उतरीं और सीधे जनता के बीच पहुंच गईं। अचानक राष्ट्रपति को अपने इतने करीब पाकर लोग भावुक हो उठे। बैरिकेडिंग के बाहर खड़े लोगों ने ‘भारत माता की जय’ के नारों से पूरे क्षेत्र को गुंजायमान कर दिया। राष्ट्रपति ने भी हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और मुस्कुराते हुए लोगों से आत्मीय संवाद किया।
खरकाई पुल मार्ग पर भी किया जनता का अभिवादन
राष्ट्रपति यहीं नहीं रुकीं। आगे खरकाई पुल की ओर जाने वाले मार्ग पर भी उन्होंने सड़क किनारे खड़े लोगों का अभिवादन किया। यह दृश्य सुरक्षा कर्मियों के लिए चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन राष्ट्रपति के इस कदम ने लोगों के दिलों में उनके प्रति सम्मान और भी बढ़ा दिया।
स्थानीय लोगों का कहना था कि राष्ट्रपति का इस तरह आमजन के बीच आना उनके लिए गर्व और भावनात्मक क्षण था। कई लोगों ने इसे जनता और संवैधानिक पद के बीच आत्मीय संबंध का प्रतीक बताया।
NIT जमशेदपुर के दीक्षांत समारोह से लौटते समय बना यादगार पल
गौरतलब है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू सरायकेला जिले में NIT जमशेदपुर के 15वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने आई थीं, जहां उन्होंने छात्रों को संबोधित किया और डिग्रियां प्रदान कीं। समारोह के बाद वापसी के दौरान यह अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया, जिसने पूरे दौरे को और खास बना दिया।
विशेषज्ञों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि राष्ट्रपति का यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों और जनता से जुड़ाव को दर्शाता है। इससे यह संदेश गया कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति भी आम नागरिकों के भावनाओं को प्राथमिकता देता है।
सरायकेला-जमशेदपुर के लिए ऐतिहासिक दिन
राष्ट्रपति के इस जनता प्रेम और सादगी भरे व्यवहार ने सरायकेला और जमशेदपुर के लोगों के लिए इस दिन को ऐतिहासिक बना दिया। सोशल मीडिया पर भी इस पल की चर्चा तेज रही और लोगों ने राष्ट्रपति की सरलता और संवेदनशीलता की जमकर सराहना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सरायकेला में प्रोटोकॉल तोड़कर जनता से मिलना केवल एक क्षणिक घटना नहीं, बल्कि यह जनता और सत्ता के बीच विश्वास और आत्मीयता का प्रतीक बन गया। उनकी सादगी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संवैधानिक मर्यादा के साथ मानवीय संवेदना कितनी महत्वपूर्ण है।

