राजधानी रांची के निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में इलाज कराने वाले मरीजों को अब उपचार पर होने वाले खर्च की जानकारी आसानी से मिल सकेगी। जिले के सभी अस्पतालों और क्लीनिकों को अपना निबंधन प्रमाण पत्र और इलाज का रेट चार्ट रिसेप्शन या प्रवेश द्वार के पास प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही संस्थानों को वहां कार्यरत डॉक्टरों की डिग्री, योग्यता और विशेषज्ञता से जुड़ी जानकारी भी सार्वजनिक करनी होगी।
निर्देश के अनुसार, अस्पतालों और क्लीनिकों को परामर्श शुल्क, विभिन्न जांच, चिकित्सकीय प्रक्रियाओं, बेड और अन्य सुविधाओं की दरें स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होंगी। इससे मरीज इलाज शुरू कराने से पहले ही संबंधित सेवाओं के शुल्क की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे और अपने बजट के अनुसार निर्णय ले सकेंगे।
डॉक्टरों की योग्यता और अनुभव की देनी होगी जानकारी
अस्पतालों को अपने यहां कार्यरत सभी चिकित्सकों के नाम, उनकी चिकित्सा योग्यता, संबंधित मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण संख्या, विशेषज्ञता और अनुभव की जानकारी भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करनी होगी। इसका उद्देश्य मरीजों को इलाज करने वाले डॉक्टरों की शैक्षणिक और पेशेवर योग्यता के बारे में पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराना है।
क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट-2013 के प्रावधान होंगे लागू
इस संबंध में रांची के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (सिविल सर्जन) ने क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट-2013 के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है। जिले के सभी संबंधित चिकित्सा संस्थानों को सात दिनों के भीतर जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने को कहा गया है।
आदेश का पालन नहीं करने वाले संस्थानों की कमी निरीक्षण के दौरान दर्ज की जाएगी। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है। यह आदेश 29 अगस्त को जारी किया गया था।
निजी अस्पतालों की सेवाओं में पारदर्शिता पर जोर
इस पहल का उद्देश्य निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में मरीजों को उपलब्ध चिकित्सा सेवाओं, सुविधाओं और उनके शुल्क की स्पष्ट जानकारी देना है। इससे इलाज के नाम पर मनमानी वसूली पर अंकुश लगाने और मरीजों के अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिल सकती है।

