झारखंड की राजधानी रांची के रातू थाना क्षेत्र स्थित चटकपुर (शांति नगर) में एक दर्दनाक हादसे में दम घुटने से मां और उसके ढाई साल के बेटे की मौत हो गई। वहीं, परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से बेहोश हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
मृतकों की पहचान 32 वर्षीय पिंकी देवी और उनके ढाई वर्षीय बेटे अभिमन्यु कुमार के रूप में हुई है। परिवार मूल रूप से बिहार के छपरा का रहने वाला बताया गया है।
जलता चूल्हा कमरे में छोड़कर सो गया था परिवार
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात पिंकी देवी ने कोयले के चूल्हे पर खाना बनाया था। भोजन करने के बाद जलता हुआ चूल्हा कमरे के अंदर ही रह गया और परिवार दरवाजा बंद कर सो गया। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं होने के कारण रातभर कोयले से निकली जहरीली कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस भर गई, जिससे सभी का दम घुटने लगा।
दरवाजा खोलने की कोशिश भी नहीं बचा सकी जान
बताया जाता है कि रात में पिंकी देवी की 17 वर्षीय ननद चंदा कुमारी की नींद खुली। उसने दरवाजा खोलने की कोशिश की, लेकिन दम घुटने के कारण बेहोश होकर गिर गई। कमरे में मौजूद एक अन्य मासूम बच्चा भी बेहोश हो गया।
सुबह छत तोड़कर निकाला गया परिवार
शनिवार सुबह काफी देर तक कमरे का दरवाजा नहीं खुलने पर परिजनों और स्थानीय लोगों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद एस्बेस्टस की छत तोड़कर और दरवाजा खोलकर सभी को बाहर निकाला गया। अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने पिंकी देवी और उनके बेटे को मृत घोषित कर दिया, जबकि दो अन्य लोगों का इलाज जारी है।
बंद कमरे में जलता कोयला बन सकता है जानलेवा
विशेषज्ञों के अनुसार, बंद कमरे में जलता या सुलगता कोयला कार्बन मोनोऑक्साइड गैस छोड़ता है। यह रंगहीन और गंधहीन गैस शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रोक देती है, जिससे व्यक्ति बेहोश हो सकता है और समय पर मदद नहीं मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं, इस घटना के बाद लोगों से बंद कमरे में कोयले या लकड़ी का चूल्हा जलाकर नहीं सोने और पर्याप्त वेंटिलेशन सुनिश्चित करने की अपील की गई है।

