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रांची के ट्यूलिप हॉस्पिटल पर बड़ी कार्रवाई, मरीज से दुर्व्यवहार मामले में लाइसेंस अंतरिम रूप से निलंबित

मरीज से दुर्व्यवहार के मामले में रांची के रिंग रोड स्थित ट्यूलिप हॉस्पिटल के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के निर्देश के बाद रांची सिविल सर्जन ने अस्पताल के पंजीकरण/लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से अंतरिम रूप से निलंबित कर दिया है। यह निलंबन विस्तृत जांच पूरी होने और सक्षम प्राधिकारी के अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा।

जानकारी के अनुसार, 10 सितंबर 2026 को ट्यूलिप हॉस्पिटल में हुई घटना को स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने रांची सिविल सर्जन को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (रजिस्ट्रेशन एवं रेगुलेशन) अधिनियम, 2010 और झारखंड क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स नियम, 2013 के तहत यह कार्रवाई की गई।

नए मरीजों और नई सर्जरी पर रोक

अंतरिम निलंबन के दौरान अस्पताल में नए OPD मरीजों का पंजीकरण और इलाज, नए IPD मरीजों की भर्ती, नई इलेक्टिव सर्जरी समेत अन्य नई क्लिनिकल सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। अस्पताल प्रबंधन को आदेश का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

हालांकि, अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों को इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा। प्रबंधन को सभी भर्ती मरीजों को जरूरी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने, उनकी सूची प्रस्तुत करने और जरूरत पड़ने पर संबंधित अस्पतालों तथा सक्षम अधिकारियों के समन्वय से सुरक्षित स्थानांतरण सुनिश्चित करने को कहा गया है।

CCTV समेत सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का आदेश

स्वास्थ्य विभाग ने 10 सितंबर की घटना से जुड़े सभी रिकॉर्ड और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का भी निर्देश दिया है। इनमें मरीजों की केस शीट, OPD और IPD रजिस्टर, उपचार से जुड़े दस्तावेज, सहमति पत्र, जांच रिपोर्ट, ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रिकॉर्ड, CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा शामिल हैं।

रिकॉर्ड में किसी तरह का बदलाव, उसे नष्ट करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। मामले की विस्तृत जांच सक्षम प्राधिकारी या गठित समिति द्वारा की जाएगी।

‘अस्पताल इलाज के लिए है, गुंडागर्दी के लिए नहीं’

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि मरीजों के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल इलाज के लिए है, गुंडागर्दी के लिए नहीं। मरीजों या उनके परिजनों के साथ दबंगई, मारपीट या किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि कानून से ऊपर कोई अस्पताल, संचालक या व्यक्ति नहीं है। नियमों की अनदेखी या मरीजों के अधिकारों के उल्लंघन के मामले में निजी अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

शव रोकने के मामले में भी सख्त चेतावनी

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पतालों को चेतावनी देते हुए कहा कि मरीज की मृत्यु के बाद केवल बकाया राशि की वसूली के दबाव में शव रोकना स्वीकार्य नहीं है। मृतक और उसके परिजनों की गरिमा एवं मानवीय संवेदनाओं का सम्मान करना अस्पतालों की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि सरकार निजी अस्पतालों के खिलाफ नहीं है और नियमों का पालन करते हुए बेहतर चिकित्सा सेवा देने वाले अस्पतालों को सहयोग दिया जाएगा। लेकिन मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाने, नियमों की अनदेखी करने या मरीजों व परिजनों के साथ दुर्व्यवहार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

मंत्री ने कहा कि झारखंड में स्वास्थ्य सेवा को जनसेवा का माध्यम बनाया जाएगा और मरीजों के स्वास्थ्य एवं सम्मान से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं होगा।

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